14 सितम्बर हिंदी दिवस पर विशेष दोहावली : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
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दोहावली
शीघ्र राष्ट्रभाषा बने जग में हो पहचान
– दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
[ भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ]

जननी संस्कृत कोख से, जन्मी हिन्दी बोल।
उन्नति ही करती रही, समय-समय रस घोल।२।
माह सितम्बर वर्ष है, उन्निस सौ उन्चास।
चौदह पड़ा दिनांक जो,दिवस हुआ यह खास।२।
आज राजभाषा बनी, भारत की अनमोल।
देवनागरी लिपि लिखें, हिन्दी में लिख-बोल।३।
कर सिरजन साहित्य का,हिन्दी में हिय खोल।
भाषा है यह भारती, आंग्ल संग मत तोल।४।
लिखते रचना गर्व से, वाचन में भी ठाठ।
देता रस अनुभूति सब, हिन्दी कविता पाठ।५।
दुनिया में है तीसरा, बोलचाल का स्थान।
जननी आविष्कार की, हिन्दी ज्ञान-विज्ञान।६।
सहज सरल भाषा यही,जो है अतिशय ऋद्ध।
पुरुष वचन अरु वर्तनी, उच्चारण में शुद्ध।७।
शब्द कोष हिन्दी हुई, ढाइ लाख से पार।
तकनीकी विज्ञान में, संभावना अपार८।।
अपनी अब सरकार भी,हिन्दी पर दे ध्यान।
शीघ्र राष्ट्रभाषा बने, जग में हो पहचान।९।
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• 98271 90993
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chhattisgarhaaspaas
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