नव वर्ष पर विशेष काव्यात्मक रचना- विद्या गुप्ता

• अधूरी बात पर आत्मविराम है कविता
– विद्या गुप्ता
[ छत्तीसगढ़-दुर्ग ]

दुख सुख के दल बादल से
द्वंद्व और व्यथा के भंवर जाल से
चमकी आशा की कौंध
काव्य बन गई
रच गई … एक ग्रंथ.
हर अंतर
कविता का घर
निर्झर बहते भावों की
धार है कविता
मनभावन क्षण हो या
वेदना का पल हो….
झरती फुहार है कविता
थके तन पर
पसीना सुखाती
ठंडी बयार है कविता
पतझड़ के तन पर उगता
कोमल हरा पात है कविता
भूख की सलवटो में तृप्ति
एक राग है कविता
अधूरी बात पर
अल्पविराम है कविता
अनकही को कहती
पूर्णविराम है कविता
ग्रंथ अधूरे रह गए
पूरी बात है कविता
खिलखिलाती हंसी
काव्य हो गई
हरी हुई पीड़ा
बंट कर मीठी हुई
दहकते अंगारों पर जमती
राख है कविता
लक्ष्मण रेखा की
काट है कविता
मेरा, तेरा नहीं…!!
हम की धार है कविता
शब्द हटा दो अर्थ हटा दो
बस आंखों का
काव्य है कविता
कवि
नहीं लिखता, कविता
कवि को
जन्म देती है कविता
जीवन संघर्षों है
होंठों पर विश्राम की
मुस्कान है कविता
[ • छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध कवयित्री विद्या गुप्ता ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ में स्तम्भ : ‘गद्य-पद्य’ की नियमित लेखिका हैं. प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की संस्थापक सदस्य भी हैं. ]
• संपर्क-
• 96170 01222
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