स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल
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किस बात का अहंकार
– प्रकाशचंद्र मण्डल
[ छत्तीसगढ़-भिलाई ]

मिट्टी के ढेले में तैयार तुम
इंसान के रूप में हो परिचय
पर तुम्हें इतना घमंड क्यों है?
किस बात का है अहंकार तुम्हारा?
दो दिन इस बाज़ार में
खरीद-फरोख्त करोगे फिर
कुछ दिन बाद तुम्हें
अपनी मंज़िल पर जाना है।
तुम्हारे दोस्त झूठे हैं,
तुम्हारे सारे रिश्तेदार झूठे हैं।
झूठी रंगीन इमारतें,
झूठे बेटे और परिजन
चार लोग तुम्हें अपने कंधों पर
रेत के टीलों तक ले जाएँगे,
नहीं तो ले जाएंगे तुम्हें
इलेक्ट्रीक के घर में
तुम्हारा सुन्दर शरीर
जलकर राख हो जाएगा।
फिर इतना घमंड क्यों है?
बताओ भाई,
तुमने इस जीवन में क्या किया है?
तुम्हारी मेहनत का क्या फल मिला
आखिर में, सारी ज़िंदगी
मेहनत ही करते रहे
अंत में सब कुछ गंवाओगे।
अब हरि के नाम पर नाव बहाकर
चलो बह चलें, ज्वार के खिंचाव से।
सारे दुःख मिट जायेंगे,जब
हरि हमें अपने करीब ले जायेंगे।
[ • प्रकाशचंद्र मण्डल बांग्ला-हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि हैं. इनकी अब तक बांग्ला-हिंदी में 7 काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुकी है. हॉल ही में अंतर्राष्ट्रीय बांग्ला पुस्तक मेला {कोलकाता} में इनकी सातवीं बांग्ला काव्य संग्रह ‘एखोन अनेकटा पथ चोलते बाकी’ का विमोचन किया गया. • प्रकाशचंद्र मण्डल की इसके पूर्व प्रकाशित कृति है- ‘तुमि एले ताई’ {बांग्ला} ‘एक फाली रोद्दुर’ {बांग्ला} ‘आमाके उन्मुक्त करो’ {बांग्ला} ‘कखोन जे कोन कथा कबिता होए जाए’ {बांग्ला} ‘शब्दों की खोज में’ {हिंदी} और ‘फिर भी चलना होगा’ {हिंदी}. • अनेकों सम्मान से सम्मानित प्रकाशचंद्र मण्डल प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य व कोषाध्यक्ष एवं ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उप सचिव हैं. ]
• कवि संपर्क-
• 94255 75471
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chhattisgarhaaspaas
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