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  • ■रचना आसपास : •सुजीत जायसवाल ‘जीत’.

■रचना आसपास : •सुजीत जायसवाल ‘जीत’.

4 years ago
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●मृत्यु प्रेयशी
-सुजीत जायसवाल ‘जीत’
[ कौशाम्बी, प्रयागराज-उत्तरप्रदेश ]

मृत्यु प्रेयशी नहीं बेवफ़ा न ही देगी किसी को धोखा
निर्धन हो य सम्राट अशोका, घी खा चाहे खा बाटी चोखा
माथ में शोभित दुर्घटना बिंदी बीमारी है हस्त की चूड़ी
बाढ़, भूकंप, निर्दयी कोरोना, हत्या धर रूप आनोखा

आई सी यू कछ मे हो प्रस्तुत प्रेमिका मंद मंद मुस्काती
भर निज बांह चीरे चीरगृह मे निर्वस्त्र देख इठलाती
नव सोलह श्रंगार संग हाय रे लौटा अब पुनः कोरोना
आत्महत्या कर फाँसी लटके वो प्रिय जिह्वा से बलखाती

परमात्मा का अंश जीव करें आमंत्रित वो संताप हरेंगें
यहाँ स्वजन मोह माया वश दुख, क्रंदन, चित्कार करेंगे
तज मोटा गद्दा तुझको कांठ के सैय्या पे लेटना होगा
भूल के स्वप्न में ना आना तेरे अपने ही तुझ से डरेंगे

दस दिन का हो क्रिया कर्म मूरख ढाई दिन में कर डाला
निज सुख सुविधा मां को भूला नव माह कोख में पाला
तर्क, वितर्क, कुतर्क न कर जरा पढ़ ले तू गरुड़ पुराण
सत्य सनातन धर्म ज्ञान पुस्तिका सुन मैंने आज खंगाला

पितृ दोष का जतन तू जप श्री विष्णु भोले अभिराम
पिंडदान श्रद्धा पूर्वक कर तू ले जा अब गया के धाम संगम काशी गंगधार में मन्त्रोंचारित श्रद्धा की डुबकी
आशीष पूर्वजों का ले ले पगले सदा आएगा तेरे काम

गंगा तट लंगड़ा,अंधा,कोढ़ी को मै जो देता वो रख लेता
कुकर्म ये अपना भोग रहे ये सब थे भ्रष्टाचारी नेता
जीवन है बस नाट्य मंच हम सब करते हैं बस अभिनय
निज पाप कर्म से दुःख को तू हर जन्म मे पतवार सा खेता

[ ●नगरपंचायत सरायअकिल, प्रयागराज,उत्तरप्रदेश के रहने वाले कवि सुजीत जायसवाल ‘जीत’ वैसे तो कपडे के व्यपारी हैं, पर कवि ह्रदय भी हैं. ●कानपुर यूनिवर्सिटी से एमए हिंदी साहित्य करने के बाद पैतृक व्यवसाय के साथ-साथ रचनात्मक लेखन जुड़े हैं. ●’छत्तीसगढ़ आसपास’ के वेबसाइट को ‘जीत’ ने देखा और प्रभावित होकर मुझसे आग्रह किया कि मैं भी लेखन के माध्यम से जुड़ना चाहता हूं, हमने सहर्ष स्वीकार करते हुए उनकी पहली रचना अपने वीवर्स के लिए आज़ प्रस्तुत कर रहे हैं, कैसी लगी लिखें.
●हमें ख़ुशी है कि ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ को कई प्रदेशों के साथ साथ दूरदराज गांवों में देखकर, रचनाकार इस वेब पोर्टल से जुड़ रहे हैं. ●’छत्तीसगढ़ आसपास’ सिर्फ़ 10 माह में 2,50,000+ [ 2 लाख 50 हज़ार] वीवर्स के साथ लोकप्रियता के शिखर पर है, हम रचनाकारों के ह्र्दयतम से आभारी हैं.
-संपादक]
●कवि संपर्क-
●88585 66226

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