कविता आसपास : डॉ. प्रेम कुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]
💓 अस्तित्व पतझड़ आएगा आएगा अवश्य शाख- पात होंगे विलग हवाएं ले जाएंगीं बहुत दूर। दो ठूंठ बतियाएंगे हरियाली विहीन प्रकृति की क्रूरत लहराएगी और...