ग़ज़ल : तारक नाथ चौधुरी 3 years ago 🌸 जबसे तुम्हारे गीत मैं गुनगुनाने लगा... - तारक नाथ चौधुरी [चरोदा - भिलाई, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़] जबसे तुम्हारे गीत मैं गुनगुनाने लगा। दुःख...
कविता आसपास : ओमवीर करन 3 years ago 🌸 उनसे शिकायत - ओमवीर करन [रिसाली सेक्टर, भिलाई, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़] किसी ने अच्छा और समझदार कहा मुझे, मैं सच समझकर खो गया...
रचना आसपास : किसान और आत्महत्या विपरीत ध्रव – विद्या गुप्ता [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago किसान और आत्महत्या विपरीत ध्रुव ..... अपने मृत्युलोक में किसान जलता, ठिठुरता, टूटता है टूट कर फिर जुड़ता है एक बार नहीं कई कई बार...
रचना आसपास : दरमिया – रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़] 3 years ago दरमिया जीवन के आवाजाही में कुछ तुम टूटे, कुछ हम बिखरे जिम्मेदारी के चार दिवारी में कुछ तुम उलझे, कुछ हम उलझे ऐसा नहीं,अब प्यार...
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज : ‘ योग दिवस ‘ – श्रीमती आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 योग दिवस भोग की बातें करो योग भी तुम न करो चाहते जीवन सुखी । भोर में उठकर के तुम अनुलोम विलोम करो करो...
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज : ‘ योग को अपनाएं ‘ – डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 योग को अपनाएं मेरे प्रिय बंधु मानव हम सब मिलकर योग दिवस मनाए आइए योग को अपनाकर रोग व्याधि सब दूर भगाएं बिस्तर से...
कविता आसपास : ‘ टेडी बीयर ‘ – पल्लव चटर्जी [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 टेडी बीयर हैलो टेडी! कैसे हो? जाने कब तुम्हारा साथ छोड़कर समय की उँगली थामे बहुत दूर निकल आया- जान ही न पाया। अब...
पिता दिवस पर विशेष : पिता – रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 पिता पिता,तुम्हारा खुशनुमा चेहरा देखा है तुम्हारे आंखो में खुशबू भरे ख्वाब देखा है तुम तो प्रेरणास्रोत हो प्रात: कालीन शारदीय धूप की तरह...
पिता दिवस पर विशेष : मुस्काते है पापा जी – बलदाऊ राम साहू [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 मुस्काते है पापा जी रोज सुबह ड्यूटी जाते हैं पापा जी सांझ ढले थक कर आते हैं पापा जी । अपनी पीड़ा जाने वे...
पिता दिवस पर विशेष : मेरे काका – सुधा वर्मा [रायपुर छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 मेरे काका मेरे काका हाँ वे मेरे काका थे भाई बहनों में मुझे ही कंधे पर बैठाया था। चार बजे सुबह उठ कर बेल...