रचना आसपास : दरमिया – रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़]
3 years ago
522
0
दरमिया
जीवन के आवाजाही में
कुछ तुम टूटे, कुछ हम बिखरे
जिम्मेदारी के चार दिवारी में
कुछ तुम उलझे, कुछ हम उलझे
ऐसा नहीं,अब प्यार नहीं
इक दूजे की दरकार नहीं
पर अहम के बंधन में
कुछ तुम जकड़े, कुछ हम जकड़े
जीवन के आवाजाही में
कुछ तुम टूटे, कुछ हम बिखरे
अनेक भ्रांतियां हैं यहां
खामोशी है अब दरमिया
कुछ तुम ना कहे, कुछ हम ना कहे
जीवन के आवाजाही में
कुछ तुम टूटे, कुछ हम बिखरे
कभी नाराजगी, कभी दुर्भाव रहा
कभी बुराई, कभी अपमान रहा
कुछ तुम सहे, कुछ हम सहे
जीवन के आवाजाही में
कुछ तुम टूटे, कुछ हम बिखरे
कभी प्यार,कभी टकराव रहा
कभी आंतरिक अंतरंग संबंध तो
कभी आत्मीयता का अभाव रहा
अपने,वजूद के खातिर
कुछ तुम अड़े, कुछ हम अड़े
जीवन के आवाजाही में
कुछ तुम टूटे, कुछ हम बिखरे.
•संपर्क –
•97557 94666
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)