गीत : श्रीमती आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 स्मृतियों के झरोखों से स्मृतियों के झरोखों से मैंने देखा जो बीता कल । याद आने लगे मुझे अच्छे बुरे खट्टे मीठे पल ।...
कविता : स्नेहा गोयल [रांची झारखंड] 3 years ago 🌸 माँ माँ, शब्द में ही एक जादू है, इसको बोलते ही सारी तकलीफ़ें पल में ग़ायब हो जाती है। माँ, जन्म देकर मुझे ख़ुद...
कविता : रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 धीरज तो रख धीरज ,,,,, फूल तो झड़ेंगे फिर भी कली आएगी जो फिर से एक बार मुस्कुराएगी पतझड़ के बाद जीवन में बसंत...
विशेष : गौतम बुद्ध : आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़ ] 3 years ago 🌸 गौतम बुद्ध बुद्ध पूर्णिमा के दिन जन्मे बुद्ध पूर्णिमा के दिन पाया ज्ञान ' । बुद्धपूर्णिमा के दिन ही हुआ जिनका महापरिनिर्वाण ' ।...
अवसर विशेष कविता : आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago ▪️ पत्रकार सांस्कृतिक सामाजिक आध्यात्मिक मुद्दो पर लड़ने में ' । कभी पीछे नही रहता आवाज उठाने में ' । जनता से भी जो करता...
नशामुक्त हो हमर छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ी मुक्तक 3 years ago •डॉ.दीक्षा चौबे [ दुर्ग छत्तीसगढ़ ] नशा नाश के द्वार हे , करथे सत्यानाश । तन हो जाथे खोखला , बीमारी के वास । अभी...
कविता आसपास : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरी, आंध्रप्रदेश] 3 years ago ▪️ विडम्बना पुरुष को मालूम है राकेट साइंस गोली चलने से पहले ही कर लेता है जांच पूरी लजा जाती है सी बी आई ।...
कविता आसपास : सुनीता अग्रवाल [राँची, झारखंड] 3 years ago ▪️ सखी पनघट आई है करके बहाना पानी का सखि पनघट पर देखो आई है। आई है सखि,आई है हरि को देखने आई है। कर...
ग़ज़ल : नीता कांबोज ‘ शीरी ‘ [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago ▪️ ग़ज़ल : आम और ख़ास का राज तुम क्या समझोगे... आम और ख़ास का राज, तुम क्या समझोगे कौन आम कौन है खास, तुम...
दो व्यंग्य रचना : दीप्ति श्रीवास्तव [जुनवानी भिलाई, जिला – दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago ▪️ जादुई शाम कौन कहता है शाम नीरस होती है , हमने तो सुना शामें रंगीन होती है । ये लो जनाब अब और भी...