ग़ज़ल : नीता कांबोज ‘ शीरी ‘ [भिलाई छत्तीसगढ़]
4 years ago
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▪️ ग़ज़ल : आम और ख़ास का राज तुम क्या समझोगे…
आम और ख़ास का राज, तुम क्या समझोगे
कौन आम कौन है खास, तुम क्या समझोगे
केजरीवाल तो शीशमहल ही बनवाएगा
बुद्ध ही चुनते वनवास तुम क्या समझोगे
लड़कर देख चुनाव सब जान जाओगे
नेता जी क्यों उदास तुम क्या समझोगे
सब यहां केजरीवाल ही बनना चाहें
क्यों अन्ना गए वनवास तुम क्या समझोगे
चाहते तुम भी मुफ्त नेताजी भी तो
अब है सब की चाबी पास तुम क्या समझोगे
बदलते हैं वो विचार कपड़े के जैसे ही
“शीरी” सब है बकवास तुम क्या समझोगे
•संपर्क –
•98271 08622
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chhattisgarhaaspaas
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