कविता : रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़]
3 years ago
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🌸 धीरज तो रख
धीरज ,,,,,
फूल तो झड़ेंगे
फिर भी कली आएगी
जो फिर से
एक बार मुस्कुराएगी
पतझड़ के बाद
जीवन में बसंत आएगा
पुन: नवस्फूर्ति नवप्राण लिए
जीवन खिल जाएगी
जब ऊषा कालीन
सूर्य की किरणे
नई रोशनी लाएगी
आसमां में फिर से
इन्द्रधनुष की छटा होगी
पुन: सतरंगी रंग
जीवन में लौट आएगी
जमीन के भीतर
सुप्त पड़े जो बीज
धीरज खो बैठे है
उसमे पुन: निर्मिता आएगी
सुबह के मुलायम धूप में
जब चमकेगी ओस की बूंद
उसे देख जीवन में
नई उमंग, नई चेतना आएगी
अंत के बाद
सृजन का आगाज़ होगा
धीरज तो रख
जीवन में पुन: खुशहाली आएगी
•संपर्क –
•97557 94666
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chhattisgarhaaspaas
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