कविता आसपास : सुनीता अग्रवाल [राँची, झारखंड] 3 years ago ▪️ सखी पनघट आई है करके बहाना पानी का सखि पनघट पर देखो आई है। आई है सखि,आई है हरि को देखने आई है। कर...
ग़ज़ल : नीता कांबोज ‘ शीरी ‘ [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago ▪️ ग़ज़ल : आम और ख़ास का राज तुम क्या समझोगे... आम और ख़ास का राज, तुम क्या समझोगे कौन आम कौन है खास, तुम...
दो व्यंग्य रचना : दीप्ति श्रीवास्तव [जुनवानी भिलाई, जिला – दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago ▪️ जादुई शाम कौन कहता है शाम नीरस होती है , हमने तो सुना शामें रंगीन होती है । ये लो जनाब अब और भी...
कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी 3 years ago 🌸 कैसे हो वर्तमान ? - तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] ठीक-ठीक याद नहीं.... कितने दशकों बाद आया था- मैं गाँव,अपने...
विशेष अवसर पर कविता : आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 महर्षि परशुराम श्री परशुराम भगवान विष्णु के छठवे अवतार ' । जन्मदिन पर मनाते हम अक्षय तृतीया का त्योहार । विधि विधान से निकालते...
कविता आसपास : प्रियंका यादव 3 years ago 🌸 औरत चीज नहीं होती कुछ चीजों को इस तरह रखा जाता है जैसे वह फेंकी गई हो और कुछ चीजों को इस तरह फेंका...
विशेष दिन : विशेष रचना : आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़ ] 3 years ago 🌸 डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर रामजी मालोजी सकपाल व भीमाबाई की चौदहवी संतान । महुनगर में जन्मे अम्बेड गांव .से बनी पहचान । सताता था उन्हे दलितो...
साहित्य : कविता आसपास : रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़ ] 3 years ago 🌸 स्त्री एक रूप अनेक अनुरुक्त रूप लेकर अमृत तुल्य हो जाती है विरक्त रूप धर वह पल में विष बन जाती है वही स्त्री...
साहित्य : कविता आसपास : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरी, आंध्रप्रदेश] 3 years ago 🌸 चाँद और रोटी आज एक सूखे पेड़ की सबसे ऊंची टहनी पर मैं टांग आया दूधिया चांद जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि देश...
साहित्य : लघुकथा : शुचि ‘ भवि ‘ [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 संस्कार "देख कर नहीं चल सकते, अँधे हो क्या?तीन एक ही बाइक पर, वो भी रॉंग साइड और बिना हॉर्न बजाए,..." सड़क पर औंधे...