कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
3 years ago
415
0
🌸 संधिप्रकाश
– तारकनाथ चौधुरी
[चरोदा भिलाई, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़]
रजनी ढलने को है।
स्वप्न छलने को है।।
पलकों पे रुका हुआ
अश्रु-कण बहने को है।।
क्षितिज रक्तिम हुआ।
सूरज उगने को है।।
संधिप्रकाश राग पर
भैरवी सजने को है।।
जीवन रुपी खेत पर।
कर्म-हल चलने को है।।
जो अपूर्ण रह गया।
काम वो करने को है।।
जो न कल खिल सकी
वो कली खिलने को है।।
तृण खगों की चोंच पर
नीड़ नव बनने को है।।
कवि है मेज़ पर झुका
कुछ नया रचने को है।।
तारक उठो तुम भी चलो
धूप सर चढ़ने को है।।
•संपर्क –
•83494 08210
🌸🌸🌸
chhattisgarhaaspaas
Previous Post नवरात्रि विशेष : संध्या श्रीवास्तव
विज्ञापन (Advertisement)