उनवान : इंतज़ार की 15 मिनट – साजिद अली सतरंगी 4 months ago ❤ बस पंद्रह मिनट और - साजिद अली सतरंगी [ मेरठ-उत्तरप्रदेश ] वक़्त कभी इतना लंबा भी हो सकता है, ये मुझे उस शाम पता...
विशेष अवसर पर कविता- दोहा : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर 4 months ago ▪️ तुलसी विवाह इक्कीसा - ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] समय पुराने एक में, था जालन्धर क्रूर। शक्ति वान था अति जिसे,...
बाल ग़ज़ल : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 4 months ago अब क्या सोच रहे हो लल्ला ? किसको देख गये हो झल्ला। गेंद लिए गुमसुम बैठे हो, छोड़ कहाँ आए हो बल्ला । आज तुम्हें...
छठ पूजा पर्व पर विशेष : भावना संजीव ठाकुर 4 months ago ▪️ छठ पूजा-सूर्य, सत्य और संयम का महापर्व - भावना संजीव ठाकुर [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] भारतीय संस्कृति के असंख्य पर्वों में छठ पूजा अपनी अद्भुत...
साहित्य स्तम्भ ‘आरंभ’ के इस अंक में पढ़ें कुछ लघु कथाएँ : केंद्रीय विद्यालय में पदस्थ डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय की रचनाओं को 5 months ago 🟥 वक्त तुम नदी हो? लेखन सामान्यतः दो तरह से किया जाता है। पहला -आपके अन्दर कोई विचार अनायास कौंधे और आप कलम उठाने के...
विशेष अवसर पर विशेष कविता : अमृता मिश्रा 5 months ago ▪️ दशहरे की रात - अमृता मिश्रा [ अध्यापिका, दिल्ली पब्लिक स्कूल, भिलाई-छत्तीसगढ़ ] आज रात फिर रावण जला! हर- घर हर मन हर्षोल्लास पला।...
‘आरंभ’ श्रृंखला-2 : डॉ. प्रेम कुमार पाण्डेय 5 months ago [ • प्रगतिशील एवं जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था 'आरंभ'. साहित्य का कोई अंत नहीं होता,अंत ही प्रारंभ है और इसी उद्देश्य को लेकर हमने गठित...
बेटी दिवस पर दो कविताएं : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय सरायपाली, छत्तीसगढ़] 5 months ago ▪️ बेटी छोटी- बिटिया सम्भालती है घर को माँ की तरह. छोटे भाई की पोंछती है नाक झाडू-बुहारू चौका- चूल्हा आए- गए में हाथ बटाती...
इस माह की ग़ज़ल : फरीदा शाहीन 5 months ago [ • छत्तीसगढ़ भिलाई की फरीदा शाहीन, भारतीय स्टेट बैंक में उप प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं. • शाहीन जी कॉलेज के दिनों में...
साहित्यिक स्तम्भ ‘आरंभ’ : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ 5 months ago [ • इस माह से हम 'छत्तीसगढ़ आसपास' में एक नया स्तम्भ 'आरंभ' प्रकाशित कर रहे हैं. यह स्तम्भ प्रगतिशीलता एवं जन विचारधारा को समर्पित...