ग़ज़ल, विनीता सिंह चौहान. 5 years ago अब क़लम क्या नया लिखे, अल्फाजों में वही दर्द दिखे. -विनीता सिंह चौहान [ इंदौर-मध्यप्रदेश ] अब कलम क्या नया लिखे। अल्फाजों में वही दर्द...
कविता 5 years ago धरा पर उतरो महेश्वर, औऱ जगत का दुःख हरो, शत्रु का विनाश करने, रुद्र रूप तुम धरो. ●तारकनाथ चौधुरी धरा पर उतरो महेश्वर और जगत...
महाशिवरात्रि विशेष 5 years ago ■बाबा भोलेनाथ -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया-कबीरधाम-छत्तीसगढ़ ] ध्यान मग्न रहते सदा, पर्वत करते वास। बाबा भोले नाथ जी, पूरा करते आस।। कांँवर पकड़े हाथ...
छत्तीसगढ़ी बाल कविता 5 years ago ■सांस कहां ले पातेन -डॉ. बलदाऊ राम साहू [ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ] अगर पेड़ नइ होतिस जग मा कहाँ चिरइया गातिस कहाँ बनातिस खोंघरा वो हर...
असहाय कविता 5 years ago ●उड़ान भरती है मेरी कविता -गोविन्द पाल विचारों के द्वंद्व को साथ लेकर कल्पनाओं की पंख फैलाकर उड़ान भरती है कविता, जीवन के धुंध और...
छंद 5 years ago ■राजिम मेला -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया,कबीरधाम, छत्तीसगढ़] छन्न पकैया छन्न पकैया, आगे राजिम मेला। चारो कोती बगरे हावय, किसम किसम के ठेला।। छन्न पकैया...
नज़्म- तारकनाथ चौधुरी 5 years ago अजीब जंग सी छिडी़ है दर्द और हौसलों के दरम्याँ... जाने कब उसकी शातिराना चाल ने डाल दी बेडि़याँ मेरे पाँव में, रुक सी गई...
कविता आसपास 5 years ago ■तुम वैसी ही हो मेरे लिए. -तारकनाथ चौधरी तुम वैसी ही हो मेरे लिए जैसे देह में आग,कंठ में गान, सरित में नीर,तूफां में तीर,...
शरद कोकास [ दो लम्बी कविताएं ‘देह’ औऱ ‘पुरातत्ववेत्ता’ के कवि ] 5 years ago ■छत्तीसगढ़ के सु-प्रसिद्ध कवि शरद कोकास ने 'एक अच्छी ख़बर' को मित्रों के साथ शेयर किया,जिसे हम अपने पाठकों,वीवर्स के लिए हु-ब-हु प्रकाशित कर रहे...
छत्तीसगढ़ी आसपास 5 years ago ■आगे पहुना बसंत -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई-छत्तीसगढ़ ] पिरीत के पानी म मया के रंग घोरे, आगे पहुना बसंत देख तो रे ।...