poetry

कविता -गोविन्द पाल, छत्तीसगढ़

●पैदल ही चल पड़े [ गोविन्द पाल,प्रदेश के चर्चित बाल रचनाकार हैं. लॉक डाउन के दौरान अखबारों में छपी एक घटना से गोविन्द पाल जी...

ग़ज़ल

●एक ग़ज़ल दिल से -लतीफ़ खान 'लतीफ़' मैं रहा ग़मों से यूँ आशना, कि कभी ख़ुशी से न निभ सकी !! यूँ ही सारी उम्र...

नवगीत

●मैं तेरा सम्मान करूँगा -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' तू मेरा सम्मान कराना मैं तेरा सम्मान करूँगा दिग्गज लोगों की श्रेणी में तुझे बिठा, गुणगान करूँगा...

कविता- संतोष झांझी

●बासंती बयार बासंती बयार हमें न सता न बालों को छू न आँचल उड़ा अमराई गदराई कोयल भी बौराई लगती है भली भली पेड़ों की...

कविता- कल्याणी तिवारी

●आओ लिखे हम शहीदों के नाम ●जो बन गये सितारों की शाम आओ लिखे हम शहीदों के नाम जो बन गये सितारों की शाम सीने...

ग़ज़ल- डॉ. बलदाऊ राम साहू

हुआ है अँधेरा न जाने इधर क्यूँ, नन्हा-सा दीया उधर तुम जला दो। कहानी पुरानी किताबों में है जो, जरा पढ़ केअब तुम हमें भी...

बचपन आसपास

●बसन्त के स्वागत में -डॉ. बलदाऊ राम साहू भँवरों का है गुंजार सखी बासंती रंग, बयार सखी. महुआ गंध बिखेर रहा है कर के सोलह...

गीत

● आओ । बैठ कर गीत लिखें -विजय पंडा आम्र बौर के नीचे आओ ! बैठ कर गीत लिखें ; हल्की - बहकी ठंड में...

बचपन आसपास

●हिंद की-युक्तिका ●धीरे से मुस्कुराती है -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' धीरे से मुस्काती है फिर वो रोती-गाती है हर सामाँ को फैलाने पहले ख़ूब जमाती...
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