कविता, जीवन की परिभाषा- सरोज तोमर 5 years ago रात-रात भर चंदा करता, जग कर अवनि की रखवाली। लेकिन रूप सजाया करती, सूरज से धरती मतवाली । जीवन की परिभाषा हँस- हँस कर देना...
कविता, मुस्कुराना सीखो- उज्ज्वल प्रसन्नो 5 years ago फ़ूलों की तरह मुस्कुराना सीखो । ग़मज़दा हो तो फ़रमाना सीखो ।। खुशबू से मुहब्बतें महकाना सीखो । पंखुड़ियों से आपस मे जुड़ जाना सीखो...
प्रकाश पर्व पर विशेष भजन- शुचि ‘भवि’ 5 years ago सारी दुनिया में नानक की होती जय-जयकार है नमस्कार गुरु के चरणों में मेरा बारंबार है जात-पात को ख़त्म करे जो हर भूखे का पेट...
कविता, कब-तक यों चलते जायेंगे ? – डॉ.सुभद्रा खुराना, भोपाल-मध्यप्रदेश 5 years ago जीवन गतिशील है गति ही प्रगति देती है आशावान बने रहे कब तक यों चलते जायेंगे ? उभरेंगे चाँदी के तारक सिहरेंगे, ढलते जायेंगे। कब...
कविता, आख़िरी पन्ना – रमेश कुमार सोनी, बसना-छत्तीसगढ़ 5 years ago मैं पहाड़ों की श्रृंखलाओं में कुछ किताबें पढ़ने गया था, कुछ अच्छा सुनने की चाहत मुझे खींचकर ले गयी थी एक वृद्धाश्रम में हाँ,वहीं जहाँ...
लघुकथा, मीठी बोली- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती 5 years ago -"अम्मा जी" बहू की आवाज कानों में पड़ी तो शांति देवी ने जल्दी से आंखें पोंछ ली और अपने कपड़ों को पलंग पर यूं ही...
ग़ज़ल -शुचि ‘भवि’ 5 years ago किसी ख़ुशी से इन्हें अब ख़ुशी नहीं मिलती किसी भी चेहरे की रंगत खिली नहीं मिलती लिखा था तुमने जो ख़त में हमारा नाम कभी...
गीत -शुचि ‘भवि’ 5 years ago बिन सूरज के जैसा होगा रोज़ यहाँ पर दिन मेरा भी जीवन वैसा ही मीत तुम्हारे बिन चिड़ियों का कलरव है ग़ायब मन ठहरा-ठहरा फ़लक...
देव उठनी, प्रबोधिनी एकादशी, तुलसी विवाह पर विशेष कविता -आलोक शर्मा 5 years ago जागेंगे आज जगतपति जागेंगे आज जगन्नाथ उठेंगे योगनिद्रा से जगत के पालनहार सोयी नहीं है सबकी प्रार्थना जागती रही है मनोकामना विनय के , हमारे...
जाड़ा आया- बलदाऊ राम साहू, दुर्ग-छत्तीसगढ़ 5 years ago शाल, स्वेटर, मफलर लेकर जाड़ा आया, जाड़ा आया। मुस्कुरा रही गरम रजाई गरमी की अब करो विदाई। धूप सुनहरी हँसते आई सुबह-सुबह यह है सुखदाई।...