poetry

लघुकथा

●बांटने का सुख ●तेजराम शाक्य बांटने का सुख आज की बात एक घटना से प्रारंभ करते है। बात 60 के दशक की होगी जब उस...

बचपन आसपास

●कबूतर आया ●डॉ. बलदाऊ राम साहू उड़ते हुए कबूतर आओ मेरी छत के ऊपर आओ। पंछी भी आएँगे उड़ते तुम भी साहस भरकर आओ। इधर...

बचपन आसपास

●खेल रही है पानी से ●डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' ●कोरबा-छत्तीसगढ़ खेल रही है पानी से छिपकर नाना-नानी से हँसकर बोला करती है गुपचुप तितली रानी...

ग़ज़ल

कितनी चल ये चाल गया मुश्किल से ये साल गया ●शुचि 'भवि' कितनी चल ये चाल गया मुश्किल से ये साल गया साल नया अच्छा...

हिंद की युक्तिका

●नया वर्ष हूँ ●डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' स्वागत सत्कार करो मेरा नया वर्ष हूँ मैं ही आशा- निराशा, पीड़ा हूँ, हर्ष हूँ बीत चुके हैं...

कविता

●कैसे मनायेंगे नया साल ●दिलशाद सैफी ●रायपुर-छत्तीसगढ़ कैसे मनाये इस बार हम खुशी और उत्साह से ये "नया साल" इस बार तो हमें,न भरने वाला...

कविता

●कहाँ है गंतव्य ●संतोष झांझी बचपन के पांव से दौड़ी और दौड़ती ही रही बड़ी होने तक शायद किसी देखे अनदेखे गंतव्य के लिये वह...

बचपन आसपास

●अर्जुन ●डॉ. बलदाऊ राम साहू यह अर्जुन का पेड़ खड़ा है जैसे कोई योद्धा अड़ा है। विविध नाम से जाना जाता पार्थ, वीर, काहू कहलाता।...

बचपन आसपास

●जाएँ मेले -डॉ. बलदाऊ राम साहू चलो घूमने जाएँ मेले पर ना जाएँ कभी अकेले। साथ बड़े हों अपने भाई अपनी इसी में है भलाई।...

कविता

●तुम्हारी आँखें.... ●लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ●उत्तरप्रदेश तुम्हारी झील सी आँखों को देखकर.. सबसे पहले मुझे हुआ प्यार का एहसास.. जीवन के लिए जी उठी...
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