ग़ज़ल – डॉ. संजय दानी 5 years ago पेड़ों के बदन से कपड़े सारे उतर गये, बारिश के करिंदे दे कर दर्द गुज़र गये। कुछ मज़हबी आंधियां यूं आ रहीं नीचे से, के...
बाल कविता, उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो -बलदाऊ राम साहू 5 years ago उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो। मुर्गे ने हैं बाँग लगाई उठो-उठो चिड़ियाँ भी हैं चीं-चीं गाईं उठो-उठो। कौंवे बन आये हलकारे उठो-उठो गुन-गुन,गाते भौंरे...
ग़ज़ल, पिया के साथ जो सपना सजाया मिले हम तो हकीकत हो गयी है – डॉ. मधु त्रिवेदी, आगरा-उत्तरप्रदेश 5 years ago पिया के साथ जो सपना सजाया मिले हम तो हकीकत हो गयी है रखे हम व्रत करवाचौथ का जब मुहब्बत की नफ़ासत हो गई है...
बाल कविता, जंगल जाएँ -बलदाऊ राम साहू 5 years ago नाचे कुत्ता बिल्ली आकर गीत सुनाएँ कोयल गाकर। उधम मचाए बंदर भैया भोली- भाली धौरी गैया। बड़े अनोखे भालू भैया गदहे जी हैं बड़े गवैया।...
गीत, आज़ तिमिर फ़िर हारा- अमित सिंगारपुरिया, भाटापारा-छत्तीसगढ़ 5 years ago दीप जले जब जगमग-जगमग, ज्योतिर्मय उजियारा। मिट्टी के नन्हे दीपक से, आज तिमिर फिर हारा।। अंधकार में अनुपम आभा, सुंदर सपन सलोना। बाहर भीतर ऊपर...
कविता, आज़ दीपावली है- अंशुमन राय, इलाहाबाद-उत्तरप्रदेश 5 years ago आज दीपावली है ? क्या आज़ दीपावली है ? जरा पता तो करुं कि क्या आज़ दीपावली है ? झरोखा से देखा तो वही पुराना...
बचपन -डॉ. बलदाऊ राम साहू 5 years ago नन्हे - नन्हे बच्चे सारे आसमान के लगते तारे। मन के होते भोले -भाले पर मस्ती में बड़े निराले। कोमल होता है इनका मन जैसे...
मैनपाट- कविता की पृष्ठभूमि 5 years ago डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' कोरबा-छत्तीसगढ़ कविता की पृष्ठभूमि धरा का श्रृंगार है दृष्टि पड़ती है जिधर बहार ही बहार है प्रेम का अनन्य केन्द्र ये...
बाल कविता, उठो गुनगुन उठो-उठो – त्र्यम्बक राव साटकर “अम्बर 5 years ago उठो गुनगुन उठो-उठो । हुआ सबेरा उठो-उठो । चुनमुन देखो उठ गया । बिस्तर छोड़ बैठ गया । तुम भी बिस्तर छोड़ो । आँखें खोलो...
कविता, ऐसे मनाएं दीवाली -ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’, राजनांदगांव-छत्तीसगढ़ 5 years ago ऐसे मनाएं दीवाली सूरज घोले ऐसी लाली, न आएं कभी रात काली. न हो किसी को गम, सबके जीवन में हो खुशहाली. आओ ऐसे मनाएं...