गीत, आज़ तिमिर फ़िर हारा- अमित सिंगारपुरिया, भाटापारा-छत्तीसगढ़ 6 years ago दीप जले जब जगमग-जगमग, ज्योतिर्मय उजियारा। मिट्टी के नन्हे दीपक से, आज तिमिर फिर हारा।। अंधकार में अनुपम आभा, सुंदर सपन सलोना। बाहर भीतर ऊपर...
कविता, आज़ दीपावली है- अंशुमन राय, इलाहाबाद-उत्तरप्रदेश 6 years ago आज दीपावली है ? क्या आज़ दीपावली है ? जरा पता तो करुं कि क्या आज़ दीपावली है ? झरोखा से देखा तो वही पुराना...
बचपन -डॉ. बलदाऊ राम साहू 6 years ago नन्हे - नन्हे बच्चे सारे आसमान के लगते तारे। मन के होते भोले -भाले पर मस्ती में बड़े निराले। कोमल होता है इनका मन जैसे...
मैनपाट- कविता की पृष्ठभूमि 6 years ago डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' कोरबा-छत्तीसगढ़ कविता की पृष्ठभूमि धरा का श्रृंगार है दृष्टि पड़ती है जिधर बहार ही बहार है प्रेम का अनन्य केन्द्र ये...
बाल कविता, उठो गुनगुन उठो-उठो – त्र्यम्बक राव साटकर “अम्बर 6 years ago उठो गुनगुन उठो-उठो । हुआ सबेरा उठो-उठो । चुनमुन देखो उठ गया । बिस्तर छोड़ बैठ गया । तुम भी बिस्तर छोड़ो । आँखें खोलो...
कविता, ऐसे मनाएं दीवाली -ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’, राजनांदगांव-छत्तीसगढ़ 6 years ago ऐसे मनाएं दीवाली सूरज घोले ऐसी लाली, न आएं कभी रात काली. न हो किसी को गम, सबके जीवन में हो खुशहाली. आओ ऐसे मनाएं...
प्रेमानुभूति- किशोर कुमार तिवारी 6 years ago तेरी चाहत की खुशबू का एहसास है मैं यहाँ हूँ मगर दिल तेरे पास है तेरी चाहत की खुशबू का एहसास है । मैं यहाँ...
इन औरतों पर कोई कविता नहीं बनती- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती 6 years ago ये औरतें जो सोचती रहती है सहमती है घिरती है हमेशा इसी चिंता में कोई नाराज तो नहीं आप नहीं मानते? वह देखिए तीज मिलन...
गीत- शुचि ‘भवि’, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago प्रिये तुम्हीं से मिलकर मैंने जीवन को अनुपम बोला था नज़रों ने नज़रों को देखा दिल तक कुछ संदेशे आये इन संदेशों की आमद से...