poetry

कविता, कमियां हैं तो खूबियां भी होंगी- अंजली शर्मा, बिलासपुर (छ.ग.)

*कमियाँ हैं तो खूबियाँ भी होंगी* " कमियाँ न गिना ऐ मुसाफिर, कमियाँ हैं तो कुछ खूबियाँ भी होंगी। खूबियाँ हैं तो कुछ कमियाँ भी...

कविता, निखरी चंदा की छबि आँगन में- डॉ. सुभद्रा खुराना भोपाल-मध्यप्रदेश

---निखरीचंदाकीछवि आँगनमें--- निखरी चंदा की छवि आँगन में, सुरभि साँस में, प्रीत नयन में। कानों में झंकृत पग-ध्वनि-स्वर, मधुर गन्ध भर उठता अन्तर, स्तुति हित...

ग़ज़ल, जब भी चाहा आज़माना क्या करें हर दफ़े चुका निशाना क्या करें- नीलम जायसवाल, भिलाई-छत्तीसगढ़

-- '' क्या करें '' -- जब भी' चाहा आजमाना क्या करें। हर दफे़ चूका निशाना क्या करें। हम सदा पिछड़े रहे संसार में- बढ़...

ग़ज़ल, रिश्ते नाते बहुमंजिले हैं सावधान! सब रेत के टीले हैं- परमेश्वर वैष्णव, भिलाई-छत्तीसगढ़

रिश्ते नाते बहु मंजिलें हैं सावधान ! सब रेत के टीले हैं स्वार्थ, गुमान के तूफान में कई बिछुड़े और कई मिले हैं हरा भरा...

ग़ज़ल -शुचि ‘भवि’, भिलाई-छत्तीसगढ़

है इश्क़ फ़क़त तुमसे,फ़साने नहीं आते सच बोलते हैं हमको बहाने नहीं आते है इश्क़ फ़कत तुमसे, फ़साने नहीं आते सच बोलते हैं हमको बहाने...
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