कविता, कमियां हैं तो खूबियां भी होंगी- अंजली शर्मा, बिलासपुर (छ.ग.) 6 years ago *कमियाँ हैं तो खूबियाँ भी होंगी* " कमियाँ न गिना ऐ मुसाफिर, कमियाँ हैं तो कुछ खूबियाँ भी होंगी। खूबियाँ हैं तो कुछ कमियाँ भी...
कविता, निखरी चंदा की छबि आँगन में- डॉ. सुभद्रा खुराना भोपाल-मध्यप्रदेश 6 years ago ---निखरीचंदाकीछवि आँगनमें--- निखरी चंदा की छवि आँगन में, सुरभि साँस में, प्रीत नयन में। कानों में झंकृत पग-ध्वनि-स्वर, मधुर गन्ध भर उठता अन्तर, स्तुति हित...
ग़ज़ल, जब भी चाहा आज़माना क्या करें हर दफ़े चुका निशाना क्या करें- नीलम जायसवाल, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago -- '' क्या करें '' -- जब भी' चाहा आजमाना क्या करें। हर दफे़ चूका निशाना क्या करें। हम सदा पिछड़े रहे संसार में- बढ़...
कविता, आज खाने में क्या बना रही हो- बिंदु जैन, लखनऊ-उत्तरप्रदेश 6 years ago आज खाने में क्या बना रही हो पूछने वाले बच्चे बस मैगी ही खाते हैं आजकल.... गरमागरम फूली रोटी खाने वाले.. सिर्फ खाते दाल और...
करवाचौथ का चाँद -विक्रम ‘अपना’, अहिवारा-छत्तीसगढ़ 6 years ago करवाचौथ का चाँद (हास्य रचना) चाँद को देखकर चाँद भी शरमाया था करवाचौथ का त्योहार जो आया था बीबी परेशान शौहर अनजान नाना पकवान खुशियाँ...
ग़ज़ल, संतोष झांझी- भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago तुझसे रिश्ता कोई पुराना है न ही कुछ खोना न ही पाना है तुझसे रिश्ता कोई पुराना है न ही कुछ खोना न ही पाना...
ग़ज़ल, रिश्ते नाते बहुमंजिले हैं सावधान! सब रेत के टीले हैं- परमेश्वर वैष्णव, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago रिश्ते नाते बहु मंजिलें हैं सावधान ! सब रेत के टीले हैं स्वार्थ, गुमान के तूफान में कई बिछुड़े और कई मिले हैं हरा भरा...
ग़ज़ल -शुचि ‘भवि’, भिलाई-छत्तीसगढ़ 6 years ago है इश्क़ फ़क़त तुमसे,फ़साने नहीं आते सच बोलते हैं हमको बहाने नहीं आते है इश्क़ फ़कत तुमसे, फ़साने नहीं आते सच बोलते हैं हमको बहाने...
कविता, समस्या- सुरेश वाहने, कुम्हारी-छत्तीसगढ़ 6 years ago समस्या (कविता) बड़ी समस्या है कि समस्या को समस्या है समस्या की समस्या का समाधान है मगर समस्या है कि समस्या चाहती है कि समस्या...
कविता, शरद पूर्णिमा- गीता विश्वकर्मा ‘नेह’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 6 years ago शरद पूर्णिमा का गीत चाँदनी छिटकी शरद की खिड़कियों से आ रही, मुग्ध है मन,दृष्टि को भी आह कितना भा रही । बह रही शीतल...