लघुकथा 5 years ago ●भूख तो रोज़ ही लगती है न ●महेश राजा अंतिम नजर बच्चों के टिफिन पर डालकर सुरेखा ने उनकी बेग मे रखे।पानी की बाटल भरदी।अब...
लघुकथा 5 years ago ●याददाश्त और जीवन की कटुता -महेश राजा भाई साहब कह रहे थे,क्या बात है,आजकल कुछ याद नहीं रहता..बात करते-करते भूल जाता हूं.....किसी को बहुत दिनों...
लघुकथा, सांपों के होते हुए- महेश राजा 5 years ago बारिश हो रही थी।तालाब में पानी भरने लगा था।शाम होते ही मेढ़कों ने टर्राना शुरु कर दिया था। मेंढ़की ने अपने मेंढ़क से कहा-,क्यों जी।यदि...
क्रिसमस के उपलक्ष्य पर लघुकथा, मानव धर्म -महेश राजा 5 years ago रीमा सुबह जल्दी उठकर पूजा पाठ आदि से निवृत होकर क्रिस्मस टी् सजा रही थी। अवि पास आकर खड़ा हो गया-"मम्मी आप यह सब क्यों...
लघुकथा, दिसम्बर माह की एक सर्द सुबह- महेश राजा 5 years ago मौसम ने एकाएक अपना मिजाज़ बदल लिया था।यह दिसंबर की अल्ल सुबह थी।वातावरण में कोहरा और नमी थी। शिव मंदिर के सामने बन रहे नये...
कहानी, आँखों की प्यास- सुधा वर्मा रायपुर,छत्तीसगढ़ 5 years ago मनीषा की तबीयत ठीक नहीं है।उसे अपने बेटै पंकज की बहुत याद आ रही है। एक ही बेटा है।बहुत अरमानों से उसे डाक्टर बनाया था।उसके...
लघुकथा, नमस्कार की महिमा- महेश राजा 5 years ago वे बडी प्रसन्न मुद्रा में घर पहुंचे।सब्जी का थैला पत्नी को पकडाते हुए बोले,-"भागवान।तुमने तो मेरी कभी कद्र ही न की।देख लो।आज जैसे ही घर...
घोंसला- अंशुमन राय, प्रयागराज,इलाहाबाद. 5 years ago "अरे!यह क्या? गौरैया ने तो ए. सी. में भी अपना घोंसला बनाना शुरू कर दिया है।कुछ ही दिनों में तो ए. सी. चलाने की नौबत...
दो लघुकथा – महेश राजा 5 years ago ■आलोचक मित्र मित्र ने मेरी एक सामयिक रचना पर त्वरित टिप्पणी की,-"आजकल खूब अच्छा लिख रहे हो।कथ्य भी अच्छा है,पर संँस्मरण उस पर हावी हो...
लघुकथा, संघर्षशील- महेश राजा 5 years ago मित्र एक रोज मेरे घर पधारे।मैंनै दरवाजे पर उनका स्वागत किया।रिक्शेवाले को उन्होंने दस रूपये का नोट दिया। रिक्शे वाले ने कहा,-"साहबजी!महंँगाई बहुत बढ गयी...