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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में प्रति शनिवार को आयोजित ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार- विमर्श आड्डा’ में इस सप्ताह शामिल हुए – बानी चक्रवर्ती, गोविंद पाल, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, समरेंद्र बिश्वास, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, दीपाली दासगुप्ता, सोमाली शर्मा, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, सुबीर रॉय और रविंद्रनाथ देबनाथ
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में प्रति शनिवार को आयोजित ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार- विमर्श आड्डा’ में इस सप्ताह शामिल हुए – बानी चक्रवर्ती, गोविंद पाल, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, समरेंद्र बिश्वास, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, दीपाली दासगुप्ता, सोमाली शर्मा, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, सुबीर रॉय और रविंद्रनाथ देबनाथ

👉 पं. बासुदेव भट्टाचार्य का जन्मदिन मनाते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य
छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़ [इंडियन कॉफी हाउस। 27 अप्रैल ] : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ इस्पात नगरी भिलाई में विगत 62 वर्षों से निरंतर संचालित है. वर्ष भर कई साहित्यिक आयोजन होते रहते हैं. इसी कड़ी में प्रति शनिवार को आयोजित कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा है.
आड्डा प्रारंभ करने के पहले संस्था के सम्मानित सदस्य ‘हिंदू मिलन मंदिर’ के पुरोहित व बांग्ला कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य का जन्मदिन मनाया गया. सदस्यों ने उन्हें जन्मदिन की शतायु होने की शुभकामनाएं और बधाई देते हुए, पुष्पगुच्छ देकर अभिनंदन किए.

▪️ ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के पूर्व सभापति डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी के बांग्ला पुस्तक ‘सोवियत के सहयोग से भिलाई इस्पात कारखाना निर्माण का इतिहास’ का विमोचन-

👉 विमोचन [बाएँ से] प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक,पं. बासुदेव भट्टाचार्य, रविंद्रनाथ देबनाथ, प्रकाशचंद्र मण्डल, सुबीर रॉय, बानी चक्रवर्ती, गोविंद पाल, दीपाली दासगुप्ता, समरेंद्र विश्वास और दुलाल समाद्दार
▪️ काव्यपाठ-
पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने बांग्ला में एक कविता ‘पुरोहित उबाचोक…’ को कुछ इस तरह पढ़ा, सुनें…
👉 कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य कविता पाठ करते हुए…
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उप सचिव, बांग्ला-हिंदी के कवि व नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल ‘ना फिरेर देश… ‘ और ‘आमी निरु पाय… ‘ संदेशप्रद बांग्ला कविता का पढ़ा.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सलाहकार, बांग्ला-हिंदी के राष्ट्रीय कवि व अनुवादक गोविंद पाल ने हिंदी में दो कविता – 1. कुकुरमुत्ते 2.व्यंग्य रचना ‘ नेताजी की परिभाषा’ को पढ़कर सुनाया.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति, बांग्ला-अंग्रेजी भाषा की देशव्यापी कवयित्री बानी चक्रवर्ती ने चीन के ख्यातिलब्ध कवि ‘लिपो’ की कविता का बांग्ला में अनुवाद करके पढ़ा- शीर्षक था ‘प्रश्न उत्तर’, ‘नील आकाशेर नीचे’ और ‘पहाड़ आर आमी’
‘मध्य बलय’ के संपादक व बांग्ला-हिंदी के गंभीर कवि दुलाल समाद्दार और बांग्ला के लोकप्रिय कवि समरेंद्र विश्वास ने भी बांग्ला में अपनी-अपनी प्रतिनिधि कविता का पाठ किए.
राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश्वर मलिक ने अपने चिरपरिचित अंदाज में हिंदी में दो कविता को पढ़ा. 1.ओम नमो शिवाय 2. चुनाव आला रे आला
बांग्ला की चर्चित कवयित्री सोमाली शर्मा और दीपाली दासगुप्ता के कविता का शीर्षक था. ‘जीवन पोथे छंदों’, ‘मेये बेलार छो बी’ और ‘भालोभासा’
👉 बांग्ला कवयित्री सोमाली शर्मा कविता पाठ करती हुई..
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य की दो प्रगतिशील कविता ‘लोकतंत्र बनाम शाहीतंत्र’ और ‘दम्भ’ का पाठ गोविंद पाल ने किया. दोनों हिंदी कविता का अनुवाद बांग्ला में गोविंद पाल ने किया.
इस अवसर पर ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सक्रिय सदस्य देश हितैषी चिंतक रविंद्रनाथ देबनाथ और समाजसेवी सुबीर रॉय ने भी अपनी बात को साझा किए

👉 [ बाएँ से ] – सुबीर रॉय, बानी चक्रवर्ती, सोमाली शर्मा, रविंद्रनाथ देबनाथ, दीपाली दासगुप्ता, गोविंद पाल, समरेंद्र विश्वास, बृजेश मल्लिक, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, प्रदीप भट्टाचार्य और प्रकाशचंद्र मण्डल
आज के आड्डा की अध्यक्षता श्रीमती बानी चक्रवर्ती, संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त गोविंद पाल ने किया.
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