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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 81 : साहित्य चर्चा और काव्य पाठ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, पल्लव चटर्जी, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, जीबन हालदार और आलोक कुमार चंदा
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 81 : साहित्य चर्चा और काव्य पाठ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, पल्लव चटर्जी, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, जीबन हालदार और आलोक कुमार चंदा

{बाएँ से} विपुल सेन, सम रेंद्र विश्वास, बृजेश मल्लिक, आलोक कुमार चंदा, स्मृति दत्त, प्रदीप भट्टाचार्य, सुजॉशा सेन, वीरेंद्रनाथ सरकार और जीबन हालदार [फोटो सौजन्य- पल्लव चटर्जी]
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस : 31 मई, 2025]
विगत 60 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्य को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन संस्था के सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-81, 31 मई को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुई. इस विचार-विमर्श में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं बांग्ला की देशव्यापी चर्चित लेखिका एवं वयोवृद्ध कवयित्री स्मृति दत्त, लब्धप्रतिष्ठित लेखक व कवि समरेंद्र विश्वास, सुप्रसिद्ध कवि पल्लव चटर्जी, विचारवान कवि वीरेंद्रनाथ सरकार,’छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक एवं प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, साहित्यिक व सामाजिक चिंतक आलोक कुमार चंदा, बांग्ला कवयित्री सुजॉशा सेन, कवि विपुल सेन और कवि जीबन हालदार.
आज के ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 81’ की अध्यक्षता स्मृति दत्त और विशिष्ट अतिथि समरेंद्र विश्वास थे. संचालन पल्लव चटर्जी ने किया.

स्मृति दत्त ने अपनी कृति ‘त्रिधारा’ कवि जीबन हाल्दार को भेंट करते हुए…
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स्मृति दत्त ने अपनी बांग्ला कृति ‘त्रिधारा’ जीबन हाल्दार को सप्रेम भेंट किया.
इस अवसर पर स्मृति दत्त ने ‘आड्डा’ के बारे में कहा कि-
‘आड्डा’ विश्व के किसी भी देश में नहीं होता है. राजनीतिक आड्डा हो सकता है, किंतु साहित्यिक आड्डा कोलकाता में किया जाता है और इसका भिलाई में किए जाने का श्रेय समरेंद्र विश्वास को जाता है. ‘आड्डा’ में कोई नियम नहीं होता, सिर्फ शब्द होता है. कोई बड़ा नहीं, कोई छोटा नहीं. अपने लोगों के बीच में वास्तविक शब्दों के आदान-प्रदान को ही ‘आड्डा’ कहते हैं.
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काव्यपाठ हुआ , जिसका संचालन पल्लव चटर्जी ने किया…

स्मृति दत्त ने ‘दामी दु:ख’/’पायस टा पुड़े गेछे… ‘/पल्लव चटर्जी ने ‘ध्रुपति बांग्ला भाषा’/’नाटटू’/आलोक कुमार चंदा ने ‘देबागंना’/’आमी के… ‘/जीबन हालदार ने ‘आक्रांत’ और ‘पारो किया’/बृजेश मल्लिक ने कश्मीर के पहलगांव में हुए घटनाक्रम पर लिखी कविता ‘ऑपरेशन सिंदूर’/ बीरेंद्रनाथ सरकार ने आध्यात्मिक रचना ‘कभी तुम रोये… कभी मैं रोया…’/’ईश्वर की खोज में’ और ‘मेघ-र-खेला’/ समरेंद्र विश्वास ने अनुगोल्पो {लघु कथा} ‘श्रति बृष्टि’ याने स्मृति वर्षा और ‘आमा-रा साधारोण मानुष नई…’/सुजॉशा सेन ने मिनाखी दास की कविता ‘भालो थेको’ और सुब्रत पाल की रचना ‘तोमार दुर्गा.. आमार दुर्गा’ और प्रदीप भट्टाचार्य ने पर्यावरण एवं प्रकृति पर लिखी संदेशप्रद कविता ‘खूबसूरती का राज’ पढ़ा.
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कॉफी विथ साहित्यिक विचार- विमर्श आड्डा-81 की कुछ सचित्र झलकियाँ-

{बाएँ से} पल्लव चटर्जी, समरेंद्र विश्वास, बृजेश मल्लिक, जीबन हाल्दार, वीरेंद्रनाथ सरकार, आलोक कुमार चंदा, स्मृति दत्त, सुजॉशा सेन, विपुल सेन और प्रदीप भट्टाचार्य


•आभार व्यक्त वीरेंद्रनाथ सरकार ने किया.
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