महेन्द्र मद्धेशिया की लघु कविताएँ 6 months ago •1 आदिवासी गीत उसने ढोल बजाना नहीं छोड़ा, हालाँकि उसका जंगल बेचा जा चुका था। वह गाता रहा, क्योंकि गीत ही उसकी सबसे बड़ी जमीन...
इस माह की रचनाकार : डॉ. दीक्षा चोबे [दुर्ग-छत्तीसगढ़] 6 months ago ▪️ बादर आथे [ छत्तीसगढ़ी गीत ] बादर आथे घेरी बेरी, पानी ला बरसाथे। गली खोर मा चिखला माते, घाम घलो तरसाथे।। रेचक मेचक लइका...
इस माह की कवयित्री : छत्तीसगढ़ दुर्ग की प्रगतिशील विचारों की सुपरिचित कवयित्री विद्या गुप्ता 6 months ago ▪️ छोटा सा सवाल दो और दो...??? छोटा सा सवाल, दो और दो.....???? एक से नौ तक है सीढ़ियां..... जीरो लगाते हुए आकाश तक करना...
14 सितम्बर हिंदी दिवस पर विशेष दोहावली : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर 6 months ago ▪️ दोहावली शीघ्र राष्ट्रभाषा बने जग में हो पहचान - दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर [ भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] जननी संस्कृत कोख से, जन्मी हिन्दी...
कविता : तारकनाथ चौधुरी 6 months ago ▪️ संग दोष - तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] रात भर जागकर बारी-बारी से सातों घरों की पहरेदारी करने वाले कालू की आर्तनाद...
शिक्षक दिवस पर विशेष रचना : ‘मैं शिक्षक हूँ’ – गीता ज़ुन्जानी 6 months ago गुमनामी में रह कर हँसता छात्रों के भविष्य को गढ़ता रातों को भी जागता रहता मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह मैं...
साहित्यिक पत्रिका कवितायन में छत्तीसगढ़ [चरोदा-जिला दुर्ग] के सेवानिवृत्त व्याख्याता तारक नाथ चौधुरी 6 months ago ▪️ जीवन यात्रा भूमिष्ठ होते ही चल पडी़ थी मेरे जीवन की रेल शयनायनयुक्त,वातानुकूलित सर्वसुविधासज्जित नहीं बल्कि साधारण यात्री गाडी़ पर ही ठूँस दिया गया...
कवि और कविता : पल्लव चटर्जी 6 months ago ▪️ कुछ भी तो नहीं बदला कुछ भी नहीं बदला... मानव के प्रति मानव का आक्रोश सभ्यता के आँगन की सीमा लाँघकर सब कुछ युद्ध...
इस माह के कवि : डॉ. प्रेम कुमार पाण्डेय 7 months ago ▪️ खुशी दिन में एक बार बूढ़े पिता बेचैन होते हैं इंतजार करते हैं पूरी शिद्दत के साथ फोन का उधर से पूछता है बेटा...
कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी 7 months ago ▪️ स्वगत [SOLILOQUY] देवताओं के देश में रहता हूँ, राक्षसों से लड़ता रहता हूँ आहत-पराजित होकर देवालयों पर लोटता हूँ। चुप रहकर ,चुप रहने वाले...