■बचपन आसपास : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ●बाल मुक्तक : जीभ दिखाती है -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] ● मिश्का जब कुछ खाती है नानू को ललचाती है हाथ बढ़ाने...
■बचपन आसपास : •डॉ. बलदाऊ राम साहू. 5 years ago ●चूहा भागा -डॉ. बलदाऊ राम साहू [ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ] बिल्ली मौसी क्यों सोती हो फुस-फुस कर तुम क्यों रोती हो चूहा आकर उसे जगाया। थोड़ा...
■कविता आसपास : •तारक नाथ चौधुरी. 5 years ago ●जब तुम उदास होती हो -तारक नाथ चौधुरी [ चरोदा, भिलाई-छत्तीसगढ़] जब तुम उदास होती हो- अच्छा नहीं लगता मुझे पूरब का सूरज, चिडि़यों का...
■कविता आसपास : •विजय पंडा. 5 years ago ●आज़ वीरान है -विजय पंडा [ रायगढ़-छत्तीसगढ़ ] वो चाय की दुकान आज बन्द पड़ी है। कई दिनों से टूटे पड़े हैं बैंच ; उस...
■कविता आसपास : •डॉ. सोनाली चक्रवर्ती. 5 years ago ●कहाँ गए सारे रंग -डॉ. सोनाली चक्रवर्ती [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] सुनो जब तुम मेरे पास होते थे आसमान गुलाबी हो जाता था जब तुम मुझे...
■ दोहा : •प्रिया देवांगन ‘प्रियू’. 5 years ago ●पिया की राह -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया, कबीरधाम, छत्तीसगढ़ ] खिड़की देखे राह को, लगी पिया की आस। जल्दी आओ साजना, मन में हैं...
■छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ●अंधरा पोथी बाँचत हे -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] अँधरा पोथी बाँचत हे भैरा धुन मा नाचत हे मंत्री अच्छा दिन आही कहिके...
■छत्तीसगढ़ी गीत : •डॉ. पीसी लाल यादव. 5 years ago ●बार देवव तुम आगी -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई-छत्तीसगढ़ ] कर सजोर कनिहा संगी,कस लेवव तुम पागी। काँटा-खूँटी ल सकेल के,बार देवव तुम आगी।।...
■स्तम्भ : नवोदित रचनाकार. •श्रीमती सुभद्रा कुमारी. 5 years ago ●अकेले रह गये -सुभद्रा कुमारी चेहरे पर खुशी देखकर कभी आईने भी बिखर गये, आंखों से जो आंसू टपके सारे अरमान जाने किधर गये ।...
■ग़ज़ल : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ●ग़ज़ल- ग़म नहीं होगा -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] शम्मा से दूर रहोगे तो ग़म नहीं होगा फ़िजूल आग में जलने का भ्रम...