कविता 5 years ago बसन्त पंचमी -प्रिया देवांगन 'प्रियू' आता है जब पंचमी, पूजा करते लोग। हाथ जोड़ विनती करे, और लगाते भोग।। हरी भरी धरती दिखे, हरियाली चहुँओर।...
प्यार की पाती 5 years ago प्यार की पाती मिली,जवाब दिया नहीं. क्या जवाब देते,प्यार ही किया नहीं. -संतोष झांझी प्यार की पाती मिली, जवाब दिया नहीं क्या जवाब देते, प्यार...
ग़ज़ल 5 years ago ●एक ग़ज़ल - दिल से -लतीफ़ खान 'लतीफ़' उन के ख़्वाबों में खो गईं आँखें! दिल का दामन भिगो गईं आँखें! सब ख़ज़ाने लुटा के...
गीत 5 years ago ●बसंत के स्वागत में -डॉ.बलदाऊ राम साहू दुर्ग-छत्तीसगढ़ भौंरों का नव गुंजार सखी बासंती रंग, बयार सखी. महुआ गंध बिखेर रहा है कर के सोलह...
आगे पहुना बसंत 5 years ago ●पिरीत के पानी म मया के रंग घोरे ●आगे पहुना बसंत देख रे -डॉ. पीसी लाल यादव गंडई, छत्तीसगढ़ पिरीत के पानी म मया के...
माँ सरस्वती : प्रार्थना 5 years ago प्रार्थना -विजय पंडा घरघोड़ा, रायगढ़, छत्तीसगढ़ सरस्वती माँ हे! पुस्तक धारिणी हंसवाहिनी माँ हे! मंगलकरिणी। विद्या दात्री माँ हे!नभ जग तारिणी वीणा झंकृत कर माँ...
कविता -नीरज लता सिंह ‘नीरवी’, प्रयागराज, इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश. 5 years ago वही देश है वेद-मंत्रों से रक्षित सदा जो रहा ●नीरज लता सिंह 'नीरवी' ये वही देश है , 'भा' रत देश है यह सुरक्षित रहे...
बचपन आसपास 5 years ago ●धीरे से मुस्काती है -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'| कोरबा-छत्तीसगढ़. धीरे से मुस्काती है फिर वो रोती गाती है सबको आनंदित करने दिनभर रंग जमाती है...
छत्तीसगढ़ी गीत – डॉ. पीसी लाल यादव. 5 years ago ●पिवरी पहिर सरसों झूमें पिंवरी पहिर सरसों झूमे। तितली भौंरा मया म चूमे।। अरसी ह बांधे अईंठी मुरेरी पागा। बटरा तिंवरा ढिले, पिरीत के तागा।।...
कविता- रमेश कुमार सोनी, रायपुर, छत्तीसगढ़. 5 years ago ●डरता हुआ विकास -रमेश कुमार सोनी अपनी– अपनी खानदानी पनही हाथ में धरे रेंग रहे थे मंगलू– बुधारू जैसे लोग साफ़– सुथरे रास्तों पर भी!...