तीन बाल गीत- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 5 years ago ■ 1 मिश्का रानी बड़ी सयानी करती है अपनी मनमानी देख रहे हैं मम्मी - पापा दादा-दादी , नाना -नानी उसके हँसने रोने पर भी...
कविता, कैसे भूलूँ ? -अंशुमन राय, इलाहाबाद-उत्तरप्रदेश 5 years ago कैसे भूलूँ? वह रात को टिमटिमाते तारे, जो आजकल शहरों में नहीं दिखते। कैसे भूलूँ? वह चांदनी रात और वह गोल चाँद, जो लाख कोशिश...
कविता, यकीन क्या राजनीति पर है ? देखो कार्य प्रगति पर है. -सुरेश वैष्णव, भिलाई-छत्तीसगढ़ 5 years ago यकीन क्या राजनीति पर है? देखो कार्य प्रगति पर है । कवि सुरेश वैष्णव भिलाई नगर मार्ग यहां खुदा, वहां खुदा है प्रदूषण में पर्यावरण...
बाल कविता, दादी हमें सुनाओ- बलदाऊ राम साहू, दुर्ग-छत्तीसगढ़ 5 years ago आओ, दादी हमें सुनाओ एक कहानी छोटी - सी जिसमें होवें राजा-रानी राज कुमारी मोटी -सी। आसमान से आएँ परियाँ लेकर लंबी लाल छड़ी जिनके...
विश्व पुरुष दिवस पर विशेष रचना- शुचि ‘भवि’ 5 years ago सुनो तुम पुरुष हो हर दिवस ही तुम्हारा है फिर क्यों दूँ भला बधाई तुम्हें "विश्व पुरुष दिवस की" क्या युगों के बदलाव ने कभी...
कविता, कुटुमसर की मछलियां- उर्मिला शुक्ल, रायपुर-छत्तीसगढ़ 5 years ago बस्तर के कुटुमसर गुफ़ा में तैरती अंधी मछलियां सैलानियों का कुतुहल जगाती उनका मन बहलाती मछलियां हो गयी हैं अब,बहुत व्वायकुल क्या वे आई हैं...
ददरिया -डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 5 years ago ● आबे बिहनिया खवाहूँ बासी मोर मन के मँजूर तँय बारामासी ● ए फूलबासन जोहार ले ले पिरीत दे दे अपन अउ पियार ले ले...
गीत, सूरज नया उगाना है- बलदाऊ राम साहू 5 years ago सूरज नया उगाना है नया युग है सूरज हमको नया उगाना है पथ से जो भटके हैं राही राह दिखाना है । आराम नहीं प्रतिपल...
कविता, देखा करूंगी अपना नाम आसमान पर लिखा हुआ- मेनका वर्मा 5 years ago ●कविता ●देखा करूंगी अपना नाम आसमान पर लिखा हुआ... -मेनका वर्मा मैं रेत पर लिखती रही समुंदर की लहरें मिटाती रही रफ़्तार बढ़ाती रही मैं...
बाल कविता, आओ खेलें, छुपन-छुपाई- बलदाऊ राम साहू 5 years ago गिल्ली-डंडा, कंचे लेकर जल्दी से तुम आओ मुन्नू, रीमा, सीमा को भी साथ-साथ ले लाओ खेलेंगे डंडा-पचरंगा हम सब मिलकर भाई आओ खेलें छुपन-छुपाई। खो,...