कविता, हो सकता है एक दिन- प्रकाश चंद्र मंडल 6 years ago हो सकता है एक दिन इस हिंसा की दुनिया से हो सकता है एक दिन मैं चला जाऊं पर मैं हर एक पत्थर पर लिख...
ग़ज़ल -सुमन ओमानिया, नई दिल्ली 6 years ago जिनसे थी अनजान सदा मैं रही ढूंढती पहचान सदा मैं जिससे थी अन्जान सदा मैं रही ढूढ़ती पहचान सदा मैं.... रोज चुराई आँखे उनसे अब...
नव गीत- डॉ. मीता अग्रवाल ‘मधुर’, रायपुर-छत्तीसगढ़ 6 years ago झुरमुट छनती अरुण किरण धरणी खिली कमलिनी तरन ताल तरणी। आभा दमके, खुशियाँ शहनाई दुख का अंबर मेघ बरन छाई आस निराशा मानो हो तरुणी...
कविता -विशाखा मुलमुले, पुणे-महाराष्ट्र 6 years ago मन का पँछी ------------------ कभी हरी भरी दूब पर चुगती रहूँ दाना - दाना धूप फिर मनचाहा पेड़ चुनकर उस तक उड़ान भरूँ कंठ से...
गीत -सरोज तोमर 6 years ago गरल पचाकर हमने साथी, इस जीवन को अमर बनाया। मरुथल की वीरानी सहकर, हरियाली का अंकुर पाया । रक्छा गुल बगिया की होगी, नागफणी के...
स्मृति शेष शरद बिल्लोरे के जन्मदिन 19 अक्टूबर पर 6 years ago कवि- शरद बिल्लोरे प्रस्तुति- शरद कोकास भोपाल के पास इटारसी है और उसके पास है रहटगांव जहां रहते थे कवि शरद बिल्लोरे । जब भी...
गीत 6 years ago तेरे कारन -किशोर कुमार तिवारी छत्तीसगढ़ सुधियों का भंडार भरा है तेरे कारन । अधरों से श्रृंगार झरा है तेरे कारन ।। हृदय की बगिया...
ख़ाली कविता -आलोक शर्मा 6 years ago वह अंतर्मुखी था भरे दिलवाला मगर आंखों में खालीपन था सब बोल- बोलकर दुनिया कमा रहे थे बोलते समय वह शब्द को सजाता नहीं था...
नव गीत 6 years ago संतोष झाँझी भिलाई-छत्तीसगढ़ जब उलझा उलझा सा हो मन मन में उलझन सी छाई हो ये मन तब कैसे उल्लसित हो जब मन में गहरी...
कविता 6 years ago अक्षय पात्र -रमेश कुमार सोनी बसना-छत्तीसगढ़ 1 असहमति - जाने कैसे स्वीकार कर लेते हैं लोग अश्लील दॄश्य , फूहड़ गाने बजबजाते नाले सड़कों की...