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ग़ज़ल -सुमन ओमानिया, नई दिल्ली

जिनसे थी अनजान सदा मैं रही ढूंढती पहचान सदा मैं जिससे थी अन्जान सदा मैं रही ढूढ़ती पहचान सदा मैं.... रोज चुराई आँखे उनसे अब...

गीत -सरोज तोमर

गरल पचाकर हमने साथी, इस जीवन को अमर बनाया। मरुथल की वीरानी सहकर, हरियाली का अंकुर पाया । रक्छा गुल बगिया की होगी, नागफणी के...

गीत

तेरे कारन -किशोर कुमार तिवारी छत्तीसगढ़ सुधियों का भंडार भरा है तेरे कारन । अधरों से श्रृंगार झरा है तेरे कारन ।। हृदय की बगिया...

ख़ाली कविता -आलोक शर्मा

वह अंतर्मुखी था भरे दिलवाला मगर आंखों में खालीपन था सब बोल- बोलकर दुनिया कमा रहे थे बोलते समय वह शब्द को सजाता नहीं था...

नव गीत

संतोष झाँझी भिलाई-छत्तीसगढ़ जब उलझा उलझा सा हो मन मन में उलझन सी छाई हो ये मन तब कैसे उल्लसित हो जब मन में गहरी...

कविता

अक्षय पात्र -रमेश कुमार सोनी बसना-छत्तीसगढ़ 1 असहमति - जाने कैसे स्वीकार कर लेते हैं लोग अश्लील दॄश्य , फूहड़ गाने बजबजाते नाले सड़कों की...
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