कविता, मुकद्दर का सिकन्दर- त्र्यम्बक राव साटकर “अम्बर” 6 years ago " मुकद्दर का सिकन्दर " कभी मुकद्दर से पूछा है, सीधी चाल क्यूँ नहीं रहती तुम्हारी । कभी आड़ी, कभी तिरछी, बदल-बदलकर होती है चाल...
नवछंद विधान हिंदकी के संदर्भ मे- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, कोरबा-छत्तीसगढ़ 6 years ago ये हिंदकी है हिंद की पहचान है ये हिंदकी है शिल्प में इसके गज़ब की सादगी है दूर है भाषाओं की तकरार से यह देश...
ग़ज़ल 6 years ago जानें किस चीज़ की कमी है अभी, इन आँखों में क्यों नमी है अभी. -संतोष झांझी जानें किस चीज़ की कमी है अभी इन आँखों...
दिल दिया मैंने तुझे अब प्यार कर, आज मेरे हमसफ़र इक़रार कर 6 years ago ग़ज़ल -अनन्या श्री कानपुर-उत्तरप्रदेश दिल दिया मैंने तुझे अब प्यार कर। आज मेरे हमसफ़र इक़रार कर। रात बीतेगी सहर भी आएगी। इश्क़ का दरिया...
नवरात्रि पर विशेष, कहना है कुछ…बस यूं ही…! -आलोक शर्मा 6 years ago कहना है कुछ...बस यूं ही..! हे जगत जननी हे आदिशक्ति हे मां विदा हो रही हो तुम मां तो जीवन है मां कैसे विदा होगी!...
कविता, कविता क्या है ? -यशवंत सिन्हा ‘कमल’ 6 years ago कविता क्या है? वो तमाम बातें जो तुमसे कहनी थी मगर कह नहीं पाया या फिर कहा भी तो तुम समझ नहीं पायी या फिर...
कविता, प्रियतम- भूषण चिपड़े 6 years ago प्रियतम प्रियतम प्रियतम कहते कहते, प्रेमी मन मुस्काता है देख तुम्हारी सूरत को फिर, खाली मन भर जाता है सागर जैसी गहरी गहरी, आखों में...
कविता, हो सकता है एक दिन- प्रकाश चंद्र मंडल 6 years ago हो सकता है एक दिन इस हिंसा की दुनिया से हो सकता है एक दिन मैं चला जाऊं पर मैं हर एक पत्थर पर लिख...
ग़ज़ल -सुमन ओमानिया, नई दिल्ली 6 years ago जिनसे थी अनजान सदा मैं रही ढूंढती पहचान सदा मैं जिससे थी अन्जान सदा मैं रही ढूढ़ती पहचान सदा मैं.... रोज चुराई आँखे उनसे अब...
नव गीत- डॉ. मीता अग्रवाल ‘मधुर’, रायपुर-छत्तीसगढ़ 6 years ago झुरमुट छनती अरुण किरण धरणी खिली कमलिनी तरन ताल तरणी। आभा दमके, खुशियाँ शहनाई दुख का अंबर मेघ बरन छाई आस निराशा मानो हो तरुणी...