बाल कविता, उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो -बलदाऊ राम साहू
उठो-उठो जी उठो-उठो हुआ सवेरा, उठो-उठो। मुर्गे ने हैं बाँग लगाई उठो-उठो चिड़ियाँ भी हैं चीं-चीं गाईं उठो-उठो। कौंवे बन आये हलकारे उठो-उठो गुन-गुन,गाते भौंरे...