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सार्वजनिक दुर्गोउत्सव कमेटी- सेक्टर-10 ने मनाया गीत, ज्ञान और मानवता के विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती, गुरुदेव की रचनाओं की प्रस्तुति नृत्य नाट्य और कविता पाठ

👉 • रवींद्रनाथ टैगोर केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं बल्कि एक जीवित प्रेरणा है, जिनकी रचनाएं और विचार आज भी हमें बेहतर मनुष्य बनने की ओर प्रेरित करते हैं.

👉 • सार्वजनिक दुर्गोउत्सव समिति सेक्टर-10 पदाधिकारियों के साथ मुख्य अतिथि नरेंद्र कुमार बंछोर
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
‘सार्वजनिक दुर्गोउत्सव कमेटी’ ने ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा संचालित ‘प्रगति भवन’ में 20 जून, 2026 को ‘एक शाम रवींद्रनाथ टैगोर के नाम’ स्टील एक्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ़ इंडिया [सेफी] के चेयरमैन, भिलाई इस्पात संयंत्र ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वर्किंग प्रेसिडेंट नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ़ ऑफ़िसर्स एसोसिएशन के वर्किंग प्रेसिडेंट नरेंद्र कुमार बंछोर के मुख्य अतिथि में श्रद्धासुमन कार्यक्रम का आयोजन किया.

👉 • रवींद्रनाथ टैगोर श्रद्धा सुमन आयोजन में रवींद्र संगीत, भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और काव्य पाठ के विभिन्न रंगों का चित्रण ‘प्रगति भवन’ में देखने को मिला. प्रारंभ में टैगोर के तैल चित्र पर अतिथियों द्वारा पुष्प माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार भी हुआ.



इस अवसर पर मुख्य अतिथि नरेंद्र कुमार बंछोर ने कहा कि-

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता के ‘जोड़ासांको’ ठाकुरबाड़ी में हुआ था. बंगाली परंपरा में उनकी जयंती वैशाख महीने के 25वें दिन [पचीशे बैशाख] को मनाई जाती है, जो प्रतिवर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर में अलग तिथि पर आती है. इस वर्ष 2026 में यह जयंती 7 मई को पड़ी है. टैगोर का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जो साहित्य, कला और सामाजिक चेतना का केंद्र रहा. रवींद्रनाथ टैगोर को विश्वकवि कहा जाता है और यह उपाधि केवल सम्मान नहीं बल्कि उनकी रचनात्मकता की व्यापकता का प्रमाण है. 1913 में उनकी काव्य रचना ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला. रविंद्रनाथ टैगोर की सबसे विशिष्ट पहचान यह है कि उनकी रचनाएं दो देशों के राष्ट्रगान बनी. भारत का ‘जन गण मन…’ और बांग्लादेश का ‘आमार सोनार बांग्ला…’.आज इस आयोजन पर विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर को विनम्र श्रद्धांजलि और आयोजकों को बधाई.


कार्यक्रम की प्रस्तुति [समूह] में- समूह रवींद्रसंगीत अंजलि सरकार, सुदेशना बर्धन, जॉली चक्रवर्ती, अंजना घोष, कबिता बनर्जी, सोमा बोस, रूमा बर्धन, खोना स्वर्णकार और बास्वती बोस. नृत्य प्रस्तुति में- शिवानी नाग, मधुमिता भौमिक, सर्बानी स्वर्णकार, कावेरी चौधुरी, सुरंजना रॉय, अमोलिका प्रीति, इंद्राणी और सुनीता.
नृत्य परिचालन अमृता सान्याल और संचालन जॉली चक्रवर्ती ने किया. तबले में श्री जेना रहे.
ऋतुरंग और रवींद्र नृत्य नाट्य ‘चित्रांगदा’ की मनमोहक प्रस्तुति प्रस्तुत हुई. एकल रवींद्र संगीत और काव्य पाठ भी किया गया.


इस अवसर पर ‘रवींद्र सुधा’ के संयोजक विश्वजीत सरकार और ‘गीत वितान कला केंद्र’ के नृत्य शिरोमणि मिथुन दास को रवींद्रसंगीत, नृत्य और इनकी जीवनात्मक कल और आज को निरंतर प्रसार-प्रचार के लिए सार्वजनिक दुर्गोउत्सव समिति सेक्टर-10 द्वारा सम्मानित किया गया.

👉 • रवींद्र संगीतज्ञ विश्वजीत सरकार को सार्वजनिक दुर्गोउत्सव समिति द्वारा सम्मानित करते हुए समिति की सदस्या

👉 • ‘गीत वितान कला केंद्र’ छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के अनेकों स्थानों से पुरस्कृत हुआ है. टैगोर के दृष्टिकोण को मिथुन दास और इनकी पूरी टीम समर्पित भावना से काम कर रही है. सार्वजनिक दुर्गोउत्सव समिति ने इनका भी ऐसे अवसर पर सम्मान किया.


👉 • रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘शांति निकेतन’ की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि शिक्षा प्रकृति के सानिध्य में दी जाए और विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने और सीखने का अवसर मिले. फिर बाद में यही संस्थान ‘विश्व भारतीय विश्वविद्यालय’ बना.
👉 • भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोकधुनों का अद्भुत कला की प्रस्तुति…
कार्यक्रम को सफल बनाने में सार्वजनिक दुर्गोउत्सव समिति के अध्यक्ष- पीके बसु, सचिव- सजल कुमार बर्धन, डॉ. सुभाशीष मण्डल, रजत बनर्जी, पुलक बरुआ, तपन सूत्रधार, एसके घोष, डॉ. एसके सरकार और श्रीमती अदिति पोद्दार का विशेष सहयोग रहा.
[ • ये जानकारी सार्वजनिक दुर्गोउत्सव समिति सेक्टर-10 के सचिव सजल कुमार बर्धन ने ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संवाददाता को दी. ]
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