रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
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बांग्ला भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं सांस्कृतिक को इस्पात नगरी में जीवंत बनाए रखते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ विगत 65 वर्षों से निरंतर काम कर रही है. इस संस्था की स्थापना बांग्ला के सुप्रसिद्ध लेखक-कवि शिबव्रत देवानजी, डॉ. भवानी प्रसाद मुखोपाध्याय,समरेंद्र विश्वास और कुछ प्रमुख लेखकों ने की थी. संस्था द्वारा बांग्ला में साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ का प्रकाशन कई वर्षों से कर रही है. ‘मध्यबलय’ के संपादक बांग्ला के जनपक्षीय कवि दुलाल समाद्दार हैं. संस्था प्रति सप्ताह “कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा” और प्रतिमाह “साहित्य सभा” का आयोजन भी करते आ रही है.

अनेकों साहित्यिक आयोजन की कड़ी में आगामी 25 जुलाई, 2026 को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात: 11.00 बजे से ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026’ का आयोजन किया गया है. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव होंगे. इवेंट की अध्यक्षता ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के वरिष्ठ सदस्य रविंद्रनाथ देबनाथ करेंगे. गेस्ट ऑफ़ हानर सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर [प्रोजेक्ट] प्रबीर कुमार सरकार और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चित्तरंजन कर होंगे. स्पेशल गेस्ट समाजसेवी मानब सेन और बीएसपी ऑफ़िसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं ‘सेफ़ी’ के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर होंगे.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ की अध्यक्ष- बांग्ला की सुस्थापित लेखिका श्रीमती बानी चक्रवर्ती, महासचिव- शुभेंदु बागची और ‘मध्यबलय’ के संपादक- दुलाल समाद्दार ने कहा कि इस रवींद्र-नज़रूल उत्सव में प्रात: 11.00 बजे से कार्यक्रम शुरु होगा. शेड्यूल्ड इस तरह मंचस्थ होगा-


👉 • कार्यक्रम का रिहर्सल पिछले 15 दिनों से चल रहा है…
थीम सोंग [Theam Song] : गीत- शुभेंदु बागची, संगीत- दीपेंद्र हालदार, स्वर- दीपेंद्र हालदार, कॉरियोग्राफर- दीपाली दास गुप्ता और नृत्य कलाकार- अनीता सरकार एवं जॉली चक्रवर्ती.
ड्रामा [Participants in Drama]- प्रकाश मण्डल के निर्देशन और गाइडनेंस शुभेंदु बागची द्वारा प्रस्तुत नाटक- संदीप मलिक, सुबीर रॉय, ब्रजेश मलिक, स्मृति दत्त, सोमाली शर्मा, सुजॉशा सेन, ममता सरकार और प्रभाष मण्डल कलाकार होंगे. बैकग्राउंड संगीत- गौतम शील.
गीत [Song]- दीपेंद्र हालदार, मनोरंजन दास, अलंकर समाद्दार, तान्या समाद्दार, शंभु शाहा, आरएम घोष, तुहिंद्री सान्याल, पापिया गोराई, सु जॉशा सेन, माया बनर्जी, इंद्राणी मुखर्जी, प्रभाष मण्डल, देबाशीष बिश्वास, सोमेश्वर राव और अनीता सरकार.
काव्य पाठ [Recitation]- दीपाली दासगुप्ता, बानी चक्रवर्ती, विपुल सेन, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार, ममता सरकार, जॉली चक्रवर्ती, सोमाली शर्मा, सुजॉशा सेन, उदय भगत, प्रकाश मण्डल और ब्रजेश मलिक.
वॉईस [Talks]- स्मृति दत्त, पल्लव चटर्जी और वीरेंद्रनाथ सरकार.
• मंच संचालन-
• शुभेंदु बागची
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के अध्यक्ष बानी चक्रवर्ती और महासचिव शुभेंदु बागची ने कहा कि विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर और कवि काज़ी नज़रूल इस्लाम को आज याद करते हुए उनके साहित्यिक अवदानों को आज की पीढ़ी को जानना जरूरी है, इसलिए यह ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ महत्वपूर्ण है-

07 मई, 1861 को जन्में रवींद्रनाथ टैगोर के पिता और माता का नाम देवेंद्रनाथ ठाकुर व शारदा देवी था. इनकी मृत्यु 07 अगस्त, 1941 को कोलकाता में हुआ. 1913 में उन्हें उनकी काव्य कृति ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला. वे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय और पहले एशियाई साहित्यकार थे. भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन…’ तथा बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला…’ इनकी रचना है. रवींद्रनाथ टैगोर ने विश्व-भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की. इनकी प्रमुख कृति है- ‘गीतांजलि’, ‘गोरा’, ‘घरे-बाइरे’, ‘डाकघर’, ‘काबुलीवाला’ और ‘चोखेर बाली’. आप ‘विश्वकवि’ और ‘गुरुदेव’ के नाम से भी जाने जाते हैं.

कवि काज़ी नज़रूल इस्लाम का जन्म 24 मई, 1899 चुरूरिया पश्चिम बंगाल [तत्कालीन ब्रिटिश भारत] में हुआ और मृत्यु 29 अगस्त,1976 को ढाका बांग्लादेश में हुआ. इनके पिता-माता का नाम काज़ी फ़कीर अहमद और जाहिदा खातून था. काज़ी नज़रूल इस्लाम बांग्ला भाषा के महान कवि, लेखक, संगीतकार और स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्हें ‘विद्रोही कवि’ कहा जाता है क्योंकि उनकी कविताओं में अन्याय, अत्याचार और गुलामी के विरुद्ध विद्रोह का स्वर मिलता है. वे बांग्लादेश के राष्ट्रीय कवि के रूप में सम्मानित हैं. उन्होंने 3000 से अधिक गीत, कविताएं, कहानियां, उपन्यास और नाटक लिखे. उनके गीत ‘नज़रूल गीति’ के नाम से प्रसिद्ध हैं. इनकी प्रमुख रचनाएं हैं- ‘विद्रोही’, ‘अग्निवीणा’, ‘धूमकेतु’, ‘बंधनहारा’ और ‘साम्यवादी’.
रवींद्रनाथ ठाकुर और काज़ी नज़रूल इस्लाम दोनों ही भारतीय उपमहाद्वीप के महान साहित्यकार थे. रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपनी साहित्यिक प्रतिभा से विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया, जबकि काज़ी नज़रूल इस्लाम ने अपनी क्रांतिकारी कविताओं और गीतों के माध्यम से स्वतंत्रता, समानता एवं मानवता का संदेश दिया.
25 जुलाई को प्रात: 11.00 बजे से प्रारंभ होगा- थीम सोंग पर नृत्य, ड्रामा, रवींद्रनाथ ठाकुर और नज़रूल गीति पर गायन, नृत्य और रवींद्र- नज़रूल पर काव्य पाठ. समस्त प्रस्तुति, संस्था के सदस्यों द्वारा किया जाएगा.
आप सादर आमंत्रित हैं.
🙏
[ • रिपोर्ट-प्रस्तुति : प्रदीप भट्टाचार्य, मीडिया एवं पब्लिकेशन प्रभारी ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 समिति’ ]
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