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- ■साहित्य आसपास : ■कहानी संग्रह ‘पिरीत के बंधना’ का विमोचन. ■कहानीकार हेमलाल साहू ‘निर्मोही’.
■साहित्य आसपास : ■कहानी संग्रह ‘पिरीत के बंधना’ का विमोचन. ■कहानीकार हेमलाल साहू ‘निर्मोही’.
■आयोजन ‘ऋतम्भरा साहित्य समिति,कुम्हारी,जिला-दुर्ग,छत्तीसगढ़.
■विशेष उपस्थिति-डॉ. उदयभान सिंह चौहान, नारायण वर्मा,रामेश्वर शर्मा,जितेन्द्र कुशवाहा.
■आभार विक्रम शाह ठाकुर.


♀ कुम्हारी
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ऋतंभरा साहित्य समिति के तत्वावधान में कृति विमोचन, समीक्षा और काव्य गोष्ठी का कार्यक्रम प्रेस क्लब भवन कुम्हारी में सम्पन्न हुआ. मुख्य अतिथि डा. उदयभान सिंह चौहान, संस्था अध्यक्ष नारायण वर्मा, विशेष अतिथि रामेश्वर शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया.
अतिथियों के करकमलों से साहित्यकार हेमलाल साहू “निर्मोही” की सद्यः प्रकाशित कहानी संग्रह “पिरीत के बंधना” का विमोचन हुआ. संस्था अध्यक्ष नारायण वर्मा ने कृति प्रकाशन के लिए हेमलाल साहू “निर्मोही” को शाल व श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि “निर्मोही” जी संस्था के आधार स्तंभ और प्रेरणापुंज हैं.
हेमलाल साहू “निर्मोही” ने अपनी कृति पर बात रखते हुए हुए कहा -“ये कहानी संग्रह म मया पिरीत के बात हवय. बिन मया के जिनगी जिये कस नई लागय. पिरीत के बंधना अतका चेम्मर होथे कि टोरे नई टूटय.”
डा. उदयभान सिंह चौहान, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान ने हेमलाल साहू “निर्मोही” को छत्तीसगढ़ का अनमोल रत्न बताया. उन्होंने कृति की तारीफ करते हुए आह्वान किया कि छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध करने साहित्यकार अपना योगदान देवें.
जितेन्द्र कुशवाहा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने हेमलाल साहू निर्मोही के 77 वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा कि “पिरीत के बंधना” छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह पाठकों के हृदय को छूने में सफल होगी.
विशेष अतिथि रामेश्वर शर्मा, प्रांतीय संयोजक छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान ने कहा -“निर्मोही जी छत्तीसगढ़ के लोककथा की परम्परा को जीवित रखे हुए हैं. छत्तीसगढ़ के गद्य साहित्य को समृद्ध करने के लिए मैं उन्हें साधुवाद देता हूँ.”
सुरेश वाहने ने कृति की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा -“कहानी संग्रह ‘पिरीत के बंधना’ वर्णात्मक शैली में है. कथोकथन का सर्वथा अभाव है, लेकिन कहानी की रोचकता में कहीं कमी नहीं है.”
मुरारीलाल साव ने “पिरीत के बंधना” की कहानी को संग्रह की श्रेष्ठ कहानी बताया. संग्रह की कहानियाँ लोक के संघर्ष की कहानियाँ हैं.
रवीन्द्र थापा ने छत्तीसगढ़ के उदीयमान कवि अर्जुन पेड़ीडीहा की काव्य संग्रह “अंतस के आखर” पर समीक्षा में कहा -“कवि के गीतों में माटी की सौंधी महक है, जीवन के रसों का कोलाज है. उनके इस संग्रह ने छत्तीसगढ़ी काव्य को ऊंचाई दी है.”
ऋतंभरा साहित्य समिति की और से डा. उदयभान सिंह चौहान, रामेश्वर शर्मा और नारायण वर्मा को शाल व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया.
इस अवसर पर डा. उदयभान सिंह चौहान और रामेश्वर शर्मा अतिथिद्वय ने प्रशस्ति पत्र व श्रीफल प्रदान कर सभी कवियों का सम्मान किया.
कार्यक्रम में मुख्य रूप से अभयराम साहू, मुरारीलाल साव, छगनलाल सोनी, इन्द्रदेव यदु, रामाधर शर्मा, हरेन्द्र राठौर, अर्जुन पेड़ीडीहा, चिन्तामणि साहू, रियाज गौहर खान, बिसरूराम कुर्रे, रज्जाक अहमद, गजेन्द्र द्विवेदी, डा. नौशाद अहमद, यशवंत सूर्यवंशी, ओमवीर करण, कामता प्रसाद दिवाकर, जगन्नाथ निषाद आदि ने कविता पाठ किया.
[ रिपोर्ट, सुरेश वाहने. ]
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