कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

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• स्वास्थ्य

शारीरिक स्वास्थ्य
अंग समस्त शरीर के, करे ढॅंग से काम।
है ऊर्जा पर्याप्त तब, रोगों मुक्त तमाम।।
चलना-फिरना नित करें, सुबह शाम व्यायाम।
हल्का-फुल्का ही करें, मगर करें कुछ काम।।
सामाजिक सक्रिय रहें,शांत भाव कर व्यक्त।
हो शारीरिक रूप से, इंसा बहुत सशक्त।।
रहे भावनात्मक सदा, मन की स्थिरता पूर।
शक्ति निपटने की रहे, रखने तनाव दूर।।
भाव नकारात्मक सभी, देता सदा खरोंच।
यथा सकारात्मक रखें, अपने मन की सोच।।
अच्छे सबसे संबंध हों, सदा निभाऍं साथ।
अपनेपन की भावना, से लें सक्रिय भाग।।
विचलित करें न भावना,प्रभु जप करें अभेद्य।
आध्यात्मिक रख प्राप्तियाॅं, जीवन का उद्देश्य।।
काया मन मस्तिष्क को, जितना हो दरकार।
भोज संतुलित ही करें, पौष्टिक हो आहार।।
रखने स्वस्थ शरीर को,नींद जरूरी पूर।
हो तन मन मस्तिष्क के, सारा थकान दूर।।
थीम आधिकारिक यही,स्वास्थ्य दिवस पर जान।
स्वास्थ्य हेतु हों एकजुट, संगत करें विज्ञान।।
जानवरों मानव सभी, पौधे अरु ग्रह स्वास्थ्य।
आधुनिक उपचार जो, करे सदैव अकाट्य।।
जीव जंतुओं के सभी, रक्षा का है प्रश्न।
वैज्ञानिक उपलब्धियों, हेतु मनाऍं जश्न।।
चलने वाला वर्ष भर, यह साझा अभियान।
करें सभा वन हेल्थ पर, विशेष देकर ध्यान।।
अंतर्गत इस थीम के, स्तर अंतर्राष्ट्रीय।
होगा सम्मेलन शिखर, इक भव्य अ-द्वितीय।।
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• घोटाला-ही-घोटाला

घोटाला ही घोटाला है।
भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
जहाँ भी देखो सिस्टम में,
हर जगह गड़बड़ झाला है।
चिट फंड,स्पेक्ट्रम,बीमा,हेल्थ,
आई पी एल,गेम्स,कॉमनवेल्थ।
स्टाम्प, चारा, बाफोर्स, हवाला है
घोटाला ही घोटाला है,
भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
कोयले का परिवहन-कमीशन,
नेता खा गये रुपये प्रति टन।
इसमें शामिल अफसर ‘आला’ है,
घोटाला ही घोटाला है,
भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
नई आबकारी कानून बनाए,
सरकारी सब दुकान हटाए।
गली-गली निज मधुशाला है,
घोटाला ही घोटाला है,
भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
सरकारी चुनावी बाॅन्ड हो,
या महादेव ऐप काण्ड हो।
सब में लगा धन काला है,
घोटाला ही घोटाला है,
भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
हो गया जब पेपर लीक,
तो क्या ‘मोटा’ क्या ‘बारीक’।
जिसे गोपनीयता ने उछाला है,
घोटाला ही घोटाला है,
भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
[ • दशरथ सिंह भुवाल, प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य हैं. ]
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chhattisgarhaaspaas
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