कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’

▪️ हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’
• पेशे से इंजीनियर, ‘सरल’ नाम से सुप्रसिद्ध कवि सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता रहे, साहित्य लेखन में निरंतर सक्रिय हैं. • अब तक चार एकल काव्य संग्रह और लगभग 72 साझा काव्य संकलन में कविताएं प्रकाशित हुई. • देश के अनेकों साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित ‘सरल’ ‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ के छत्तीसगढ़ राज्य के उपाध्यक्ष हैं. • प्रमुख सम्मान-काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी द्वारा मानस विशेष मानद सम्मान, अंतरराष्ट्रीय ठहाका महोत्सव उज्जैन, राष्ट्रीय हिंदी साहित्य बहुउद्देशीय संस्थान जयपुर और जगदीश साहित्य संस्थान प्रयागराज उत्तरप्रदेश. •’छत्तीसगढ़ आसपास’ में ‘सरल’ की पहली रचना, पाठकों के लिए.- संपादक
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• छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ है प्यारा -प्यारा राज्य
न कोई और अब भाता है।
कर्म -भूमि छत्तीसगढ़ मेरी
छोड़ जाने का विचार न आता है।।
सरगूजा से लेकर कोंटा तक
दृश्य मनोहर लगते हैं।
छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया
नहीं किसी को ठगते हैं।।
दिल के बड़े और सहायक होते
दिल किसी का तोड़ना नहीं आता है।
महानदी और इंद्रवती का पानी
बहुत सुहाता है।।
धान की भरपूर फसल लोहा
और कोयला का भंडार बहुत यहां।
बिजली की भी कमी नहीं
बहुत बिजली का उत्पादन यहां।।
बाबा घासीदास और भी महान
साधु संतों की भूमि है।
केसकाल और चिल्फी की
मसहूर घाटी है।।
दंतेश्वरी , विमलेश्वरी , रतनपुर
की मैय्या की बरसती कृपा यहां।
चारों तरफ जहां जाओ शांतिपूर्ण
वातावरण जहां।।
बैलाडीला की मनमोहक और खूबसूरत बादियां यहां।
छोटा बढ़िया राज्य हमारा
सुंदरता ही सुंदरता नजर आती देखो जहां।।
भिलाई का स्टील प्लांट सारी दुनिया को लौहा देता है।
कोयला भण्डार भी बहुत दूसरे राज्य कोयला यहां से लेता है।।
कबीरधाम जिला विराजे भोरमदेव में भोले नाथ जहां।
गंने की पैदावार बहुत अनगिनत गुण उद्योग यहां।।
छत्तीसगढ़ है प्यारा प्यारा राज्य
न कोई और अब भाता है।
कर्म भूमि छत्तीसगढ़ मेरी
छोड़ जाने का विचार न आता है।।
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• रेडियो

बचपन बीता रेडियो सुनते सुनते
गीत बेहतरीन और मनमोहक सुनते
बिनाका, विविध भारती और न जाने
अनगिनत प्रोग्राम
गीत, कहानी और रामायण, गीता
और समाचार सुनने का काम
कबीर के दोहे, रसखान के दोहे
और भजन आदि सुनते
प्रेरणा दायक सुन बातें
सुनहरे जीवन के सपने बुनते।
मोहम्मद रफी , किशोर दा, महेंद्र कपूर और
लता जी की सुनते आवाज
अनूप जलोटा, पंकज उदास
की गजलों का साज
देखा बचपन से रेडियो कमाल
हाकी, वालीबाल और क्रिकेट कमेंट्री
का होता धमाल
घर ,गली, मोहल्ला और
गांव के चौपाल
गुजर गये यों ही कई साल
आज समय परिवर्तन हो गया
रेडियो का दौर चला गया
दूरदर्शन और मोबाइल का युग आया
पर रेडियो को आज भी न भूल पाया
रेडियो इतिहास हो गया
टैक्नोलॉजी की भीड़ में खो गया।
हमने तो देखा रेडियो का जमाना
फैशन हो गया अब पुराना
न घर में अब नजर हैं आते
बच्चे न रेडियो पहचान पाते
बाजार में भी नजर न आते
अब मिस्त्री इसे सुधार न पाते
रेडियो का अनोखा संसार है देखा
हर हाथ रेडियो है देखा
गाय चराने बाले रेडियो लेकर जाते
साथ रेडियो लेकर सुबह-शाम ठहलने जाते
१९८३ का खूबसूरत डिजाइन का
रेडियो जो मन को था भाता
बचपन का दोस्त रेडियो
आज भी मुझे याद याद आता
बचपन का दोस्त रेडियो
आज भी मुझे याद आता।
• कवि संपर्क-
• 96858 79801
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chhattisgarhaaspaas
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