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■कार्तिक स्नान का महत्व.
♀ कातिक नहाय ले शरीर निरोगी बनथे.
♀ डॉ. नीलकंठ देवांगन
[ शिवधाम कोडिया,जिला-दुर्ग,छ. ग. ]

छत्तीसगढ़ के रहवइया मन स्नान- दान- पुन्न ल बड़ महत्व देथें | ओमन सरल सुभाव के होथें अउ सच्चा मन ले धरम करम करथें | कातिक महीना पुन्न कमाय के महीना माने जाथे | ये महीना कातिक नहाय के बड़ लाभ हे | ये महीना चंदा के सोज्जे किरन धरती मं पड़थे ,तेखर सेती भरपूर ऊर्जा मिलथे | जल मं नहाय ले काया निरोगी बनथे | शरीर स्वस्थ रथे | चेहरा मं चमक आथे | तन्दरुस्ति बढ़थे | धनधान्य के बढ़ोतरी होथे | लोक जीवन मं खुशहाली आथे |
कातिक महीना मं वेद जल मं विश्राम करथें – केहे जाथे के जब शंखासुर ह वेद मन ल चोरा के समुद्र मं ले जथे, डुबा देथे, तब विष्णु भगवान केहे रथे- ‘मंत्र बीज अउ वेद आज ले हर साल कातिक महीना मं जल मं विश्राम करहीं |’ ये महीना जउन वरत उपास करहीं अउ सुरुज उये के पहिली कातिक नहाहीं , उंखर जिनगी मं यश, तेज, आयु, धन, ग्यान अउ बुद्धि बाढ़ही, समृद्धि आही, प्रत्यक्ष फल पाहीं | येला दामोदर महीना भी कहिथें | राधा दामोदर के पूजा करथें | यक्ष पूजा किये जाथे | देव, गंधर्व, ऋषि मन तीर्थ मं वास करथें |
सबो महीना मं कातिक सबले उत्तम- जइसे पौधा मं तुलसी, दिवस मं एकादशी, युग मं सतयुग, शास्त्र मं वेद, नदिया मं गंगा, तीरथ मं द्वारका के महत्व हे, उइसने महीना मं कातिक के महत्तम हे | जउन मन तीरथ बरथ नइ जा सकंय, ओमन कातिक नहा के तीरथ के पुन्न परताप ल पा सकथें | ये महीना मनवांछित फल पाय के बेरा होथे | ये ल मोक्ष के दुवार भी केहे जाथे |
इही महीना दीवाली अउ शरद पुन्नी- इही महीना अमावस के अंधियारी रात मं यानी देवारी मं लक्ष्मी जी के किरपा पाय खातिर तन मन अउ घर दुवार ल साफ सफाई करके वातावरण ल स्वच्छ बनाय जाथे, दीया जलाय जाथे, खुशी मनाय जाथे | जिनगी मं उमंग उत्साह के संचार होथे |
शरद पुन्नी के दिन सबेरे नहा के अउ रात मं चंदा के अंजोरी मं खीर बना के खाय के विधान हे | मानता हे के ये रात मं अमरित बरसथे | दमा खांसी समेत कई बीमारी ल ठीक कर देथे
ये महीना मं अउ खास- अच्छा सेहत , बने स्वास्थ्य पाय खातिर भगवान धन्वंतरि के आराधना करे जाथे | इही महीना पूरा आयु पाय बर यमदेव जमराज ल प्रसन्न संतुष्ट किये जाथे | इही महीना अंजोरी पाख के एकादशी के दिन चार महीना ले सुते भगवान विष्णु जागथे अउ आराधना के फल देथे | ये महीना आदमी के जम्मो जरूरत पूरा होय के अउ देव किरपा पाय के सुंदर योग बनथे | ये महीना के पूरा पूरा लाभ उठाना चाही |
इही महीना विष्णु भगवान ह मछली के अवतार लेके वेद के रक्षा करे रहीसे | ये महीना ल धरम, अरथ, काम, मोक्ष के देवइया केहे गे हे | ये महीना मं आलस अलबेला नइ करना चाही, सजग सावधान रहि के प्रापत बर पूरा पुरुषारथ करना चाही |
सामूहिक स्नान के महत्व- जइसे कुंभ मं सामूहिक स्नान के महत्व हे, उइसने कातिक महीना मं सामूहिक नहाय के महत्व हे | ये महीना जलाशय सरोवर के जल शुद्ध पवित्र रथे | येमा नहाय ले तन मन पबरित हो जथे | शरीर स्वस्थ निरोगी बनथे |
●लेखक संपर्क-
●84355 52828
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chhattisgarhaaspaas
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