- Home
- Chhattisgarh
- ■समीक्षा : बाल गीत संग्रह ‘सारी दुनिया एक तरफ’.
■समीक्षा : बाल गीत संग्रह ‘सारी दुनिया एक तरफ’.
♀ गीतकार-कमलेश चंद्राकर
♀ समीक्षक-विजय कुमार तिवारी

बाल गीत या बाल साहित्य की बात होती है तो मन में अनेक प्रश्न उठने लगते हैं। यह सुखद है कि दुनिया में बाल साहित्य खूब रचा जा रहा है और लिखने-पढ़ने वालों की कोई कमी नहीं है। पुस्तक मेलों में विपुल मात्रा में बाल साहित्य की,हर विधा में पुस्तकें बहुतायत मिलती हैं। प्रौढ़ लोगों के मनोविज्ञान से बाल मनोविज्ञान भिन्न होता है। शिशु का संसार सीमित होता है। उसे एक-एक चीज को समझना,सीखना और अपनी स्मृतियों में धारण करना होता है। इस दुनिया को पहचानना,स्वयं को सुखी रखना,अपनी जगह बनाना और सफल होना किसी भी बच्चे का सबसे बड़ा संघर्ष है। अच्छी और संतोष की बात है कि हर बच्चा सक्रिय होता है और प्रयास करना शुरु कर देता है। शुरु के कुछ महीनों के बाद उसके असली मुकाबले की अवधि शुरु होती है जब उस पर बंदिशें लगायी जाती हैं,उसे रोका और टोका जाता है। जब तक वह चीजों को सही तौर पर समझ पाता है,उसकी पहचान बंदिशों और विरोधों से व्यापक रुप से हो चुकी होती है। उसकी पहचान उन चीजों से पहले होती है जो नहीं करना है या जो उसके जीवन में नहीं होना है। हमारे चिंतन में,हमारे घरों में,समाज में माता-पिता हों या सरकारें सब उसे बचाना चाहते हैं। पहले उसे बताया जाता है कि आग से बचकर रहना है क्योंकि वह जलाती है। आग की उपयोगिताओं का ज्ञान वह बहुत बाद में समझता है। लगता है बाल शिक्षण या प्रशिक्षण का यह स्वाभाविक तरीका नहीं होना चाहिए। माता-पिता का,परिवार,विद्यालय या समाज का महत्वपूर्ण प्रयास होना चाहिए कि बच्चे के सामने सब कुछ स्वाभाविक रुप से उभरे,दिखाई दे और वह स्वाभाविक रुप से जाने,समझे और सीखे।
हमारे समाज में दो तरह की परिस्थितियाँ हैं। एक तो विपन्नता या गरीबी की और दूसरी सम्पन्नता और समृद्धि की। दोनों स्थितियों का बच्चे के प्रशिक्षण से कोई सम्बन्ध नहीं है। आवश्यकता है,बच्चे पर ध्यान और समय देने की। आजकल इसमें अति देखी जा रही है। बहुतायत लोग जरूरत से अधिक सुरक्षा-व्यवस्था में लगे रहते हैं और अपने बच्चे को बचाते फिरते हैं। खतरों और परेशानियों से जरूर बचाइये परन्तु उसे संघर्ष करने दीजिए ताकि वह स्वयं खड़ा हो,दौड़े,गिरे और उठे। उसे स्वयं हर चीज को समझने दीजिए। अक्सर माता-पिता दूर से ऊँची आवाज में या चिल्लाकर बच्चे को रोकते हैं,यह बच्चे को तो प्रभावित करता ही है,हमारे अपने भीतर की मधुरता और शान्ति को भंग कर देता है। पति-पत्नी मधुर भाव में,शान्त रहेंगे,घर का वातावरण मधुर और शान्त रहेगा,बच्चे पर निश्चित ही इसका बहुत अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
संयोग से बाल साहित्य के सुप्रसिद्ध रचनाकार श्री कमलेश चंद्राकर जी के बाल गीतों का संग्रह ‘सारी दुनिया एक तरफ’ मेरे हाथों में है। कमलेश जी के द्वारा लिखी हुई बाल साहित्य की अनेक पुस्तकें बच्चों के मानस को आकर्षित और आनंदित कर रही हैं। उनकी बाल कविताओं में जो भाषा प्रवाह दिखता है,जो शैली उभरी है,सुगम्य और भावपूर्ण है। रचनाओं को पढ़ते हुए लगता है,कवि चंद्राकर जी के भीतर कोई बच्चा जीवित और स्पंदित होता रहता है। बाल मन को समझना और लिखना सहज नहीं है। उनके इस सफल प्रयास के लिए बधाई और शुभकामनाएं दिया जाना चाहिए।
वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार श्री गिरीश पंकज जी ने ‘बाल कविताओं की फुलवारी के महकते सुमन’ शीर्षक से इस संग्रह की बहुत सुन्दर भूमिका लिखी है। समीक्षा की दृष्टि से देखा जाय तो यह भूमिका पर्याप्त है,उनके लेखन और इस संग्रह के लिए,फलस्वरूप मेरा काम सुगम हो गया है। उनकी कविताओं में प्रकृति खूब मुखरित हुई है जो निश्चित ही बच्चों के भीतर सीखने,समझने की जिज्ञासा जगायेगी,शिक्षाएं देगी और उत्साहित करेगी।
‘ऐसा देश’ बच्चों में देश प्रेम के साथ संस्कारित करने वाले शब्दों से परिचय करवाती कविता है। हमारा देश संसार में सबसे न्यारा है जहाँ त्याग है, शान्ति है और हरित क्रान्ति है। ‘मम्मा मेरी’ मातृ-प्रेम के भाव से भरी कविता है। बच्चों के लिए उनकी मां सुख,सुविधा और हर वैभव से बढ़कर होती है। ‘छक्कम-छल्ला’ के माध्यम से बच्चों के मन में ईश्वर-अल्ला सब एक हैं,के भाव पैदा होंगे। मछली,तोता बोला’ जैसी कविताओं से बच्चों को ज्ञान होगा कि मछली पानी में तैरती है और तोता राम-राम कहता है। बच्चों में आधुनिकता बोध भी जागता है कि अब गुड मार्निग का जमाना आ गया है। वैसे ही ‘नाव चली’ और ‘नदी’ कविता से बोध होता है कि नदी में नाव चलती है और लोग इस पार से उस पार जाते हैं। नदी पहाड़ों से उतरती है और समुद्र तक जाती है। ‘एक तरफ’ कविता में बच्चों को अहमियत देते हुए खेलने-खाने और निराश न होने की सीख दी गयी है। झूला,लट्टू,झंडा जैसी कविताएं बच्चों को इन चीजों की पहचान देती है और उनकी खेल में उपयोगिता बतलाती है। ‘चंदा-तारे’ के माध्यम से शिक्षा है कि मिल-जुलकर रहना चाहिए वरना जीवन में हार मिलती है। बाल गीत के माध्यम से शब्द ज्ञान और शिक्षा दोनों देकर चंद्राकर जी बड़ा काम कर रहे हैं।
एक चिरइया,काऊ-माऊ,गोला-गोला,चुपके-चुपके और चनन-चनन जैसी कविताएं लय के साथ गाने योग्य हैं। सबके अलग-अलग भाव हैं जो बच्चों में प्राण-चेतना और जोश भरते हैं। आग का गोला हमें रोशनी देता है। छोटी चिड़िया जल्दी में राजा की पगड़ी में बैठ गयी है। बच्चे हँसते हैं और आनंदित होते हैं। ‘मेरे दादू’ में बच्चे सात समुद्रों की जानकारी पाते हैं और उनके दादू शान से लौटे हैं। ‘मैं आता हूँ’ में बच्चे का तोते से संवाद होता है,”बैलून लेकर तू आगे चल। मैं चिड़ियों का दाना चुगाकर तनिक देर में आता हूँ।” मेरे नाना और मामाजी के माध्यम से बच्चे रिश्तों को पहचानते हैं और कंजूस,उदार जैसे शब्दों का अर्थ समझते हैं। हास्य का भी पुट है मामा जी के चश्मे में। बुढ़िया कविता में बहू का सास से अंग्रेजी बोलना और पूछना कि समझी कि नहीं,बच्चों को हँसाता है। तेरा-मेरा,जिम्मा,काले-काले,झंडा और टिका आज पर आदि ज्ञान सिखाने वाली कविताएं हैं।
‘सो जाओ,सुबह जल्दी उठना है,’ मां कहती है। बच्चा कहता है,”नहीं, मैं देर तक सोऊँगा,मुझे सपना देखना है।” पानी बरसा’ में छतरी के बिना भीग जाने की स्थिति में बच्चों का खीज जाना और दादा जी का पसीजना,रिश्तों का ज्ञान देता है। बच्चों की शरारत वाली कविता है,पम,पम,पम,पम। झनझुकरी, आगे, आगे,आगे,झुंड के झुंड,गुनमुन-गुनमुन,जोकर और चाम चपड़ा अलग तरीके से बच्चों को रोमांचित करती कविताएं हैं। ‘बाराती है’ का दृश्य रोचक है और हँसने वाली बात है कि दुल्हा अभी बस्ती में ही अटका हुआ है। टपके आम, बवंडर,जोकर,इन्द्रधनुष और सीढ़ी सभी कविताएं बच्चों में ज्ञान और उत्साह भरती हैं।
गिरीश पंकज जी ने बहुत विस्तार से बाल साहित्य पर चर्चा की है,वे लिखते हैं,”बाल साहित्य दरअसल बच्चों की आचार संहिता है। एक बच्चा कोर्स की किताबें पढ़कर अपना वाह्य विकास करता है,मगर बाल साहित्य पढ़कर के वह अपना आंतरिक विकास करता है। बाल साहित्य बच्चों में कल्पना शक्ति, तर्क शक्ति का विकास करता है,साथ ही साहसी,विनम्र और संस्कारी भी बनाता है।”

【 ●भुनेश्वर ओडिशा के विजय कुमार तिवारी देश के सुप्रसिद्ध समीक्षक हैं ●’छत्तीसगढ़ आसपास’ के लिए विजय जी पुस्तकों की समीक्षा करते हैं, आप भी अपनी पुस्तक संग्रह के लिये संपर्क कर सकते हैं. संपर्क- 91029 39190 】
●●●●● ●●●●●
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)