■बसंत रितु के गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर.
5 years ago
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मोर हिरदे के भँवरा ह गुनगुनावत हे
मया के दवना ह महमहावत हे
बसंती पुरवाही करत हे चारी
रंगे के दिन आगे बही तोर पारी
आमा के डारा म लहसत हे मउँर
मीठ लागत हे मोला कोइली के सुर
मया के संदेशा मैना देत जात हे
मोर हिरदे के भँवरा ह गुनगुनावत हे
नाचत हे रूख राई जोरे -जोरे बईंहा
परसा के फूल आज होगे हे बइहा
जीव के जंजाल तोर हँसना होगे वो
बिन फांदा मछरी के फँसना होगे वो
तोर पाँव के पैजन तरसावत हे
मोर हिरदे के भँवरा गुनगुनावत हे
सुवा रंग लुगा तोला चुकचुक ले फबथे
देखथँव तोला मोर चोला धुक ले करथे
सुघ्घर तोर मुहरन ल लेवत हे परान
मया तुमा नार के चघत हे मचान
परेवा आज कइसे इतरावत हे
मोर हिरदे के भँवरा ह गुनगुनावत हे
■कवि संपर्क-
■79995 16642
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chhattisgarhaaspaas
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