■अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष :कु.मणि माधुरी खूंटे
♀ स्वछंदता और स्वतंत्रता के अंतर को समझना जरूरी.
♀ कु.मणि माधुरी खूंटे.
आज हर तरफ महिला स्वतंत्रता की चर्चा जोरों से चल रही है । महिला स्वतंत्रता की बात होनी भी चाहिए लेकिन महिलाओं को स्वछंदता और स्वतंत्रता के बारीक अंतर को समझना भी जरूरी है । महिलाओं को स्वतंत्रता की बात करते करते स्वछंद नही होना चाहिए ।
उक्त बातें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कु. मणि माधुरी ने कही।
कु.मणि माधुरी का कहना है कि महिलाएं स्वतंत्रता की बात करते करते स्वछंदता की ओर कदम बढ़ाती है तो फिर उसके जीवन मे समस्याओं का आगमन जरुर होता है और फिर अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है ।
स्वतंत्रता मे अनुशासन समाहित होता है जबकि स्वछंदता मे अनुशासनहीनता आ जाती है । इसलिए युवतियों महिलाओं को अनुशासन के दायरे मे रहकर स्वतंत्रता की बात करनी चाहिए ।
कु.मणि माधुरी आगे कहती है कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान , उपलब्धियों के पीछे पुरूषों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है । इसलिए महिलाओं को केवल अपनी स्वतंत्रता की बात न करते हुए पुरुषों के मान सम्मान का भी ख्याल करते हुए बात करनी चाहिए।
महिला और पुरुष तराजू के दो पलड़े है जिन्हें बराबर करके ही देखना चाहिए। किसी एक पलड़े पर ही जोर दिया जाए तो संतुलन बिगड़ जाएगा। परिवार ,समाज हो या राष्ट्र निर्माण की बात हो हर क्षेत्र मे महिलाओं एवं पुरुषों मे सामंजस्य स्थापित होना जरूरी है,और यह सामंजस्य अनुशासित स्वतंत्रता से ही संभव है न कि बेलगाम स्वछंदता से ।
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