- Home
- breaking
- Chhattisgarh
- मई-जून के आने से पहले ही मार्च के महीने में बढ़ने लगा है मौसम का पारा, जाने इसके पीछे का कारण, क्या कहते हैं एक्सपर्ट
मई-जून के आने से पहले ही मार्च के महीने में बढ़ने लगा है मौसम का पारा, जाने इसके पीछे का कारण, क्या कहते हैं एक्सपर्ट
अभी मार्च का महीना चल रहा है और देश के कई हिस्सों में मई-जून की तरह लू जैसे हालात महसूस किए जा सकते हैं.
इस बढ़ती गर्मी की वजह एंटी-साइक्लोन है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राजस्थान में आमतौर पर मार्च के अंत में बनने वाला एंटी-साइक्लोन इस बार जल्दी बना है. पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय नहीं है. इससे थार मरुस्थल और पाकिस्तान से गर्म हवाएं आनी शुरू हो गई हैं, जिससे तापमान बढ़ रहा है. आईएमडी ने अगले कुछ दिनों तक तापमान में लगातार वृद्धि की भविष्यवाणी की है.
एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का मतलब असल में हवा का बिखरना है. जैसा कि इसका नाम है, एंटी-साइक्लोन में हवा की दिशाएं साइक्लोनिक हवाओं की दिशा के विपरीत होती हैं. साइक्लोनिक सर्कुलेशन में लो-प्रेशर एरिया बनता है और हवाएं आपस में मिलकर उठती हैं. वहीं, एंटी-साइक्लोनिक साइक्लोनिक सर्कुलेशन में हाई-प्रेशर एरिया बनता है जिसमें हवाएं बिरखती हैं और नीचे गिरती हैं. एंटी साइक्लोन के बीच के हिस्से में हाई-प्रेशर के चलते एक तेज हवा का ब्लास्ट ऊपर से नीचे की तरफ होता है और गर्म हवाएं नीचे आती हैं. हवा कंप्रेस होने की वजह से और गर्म होती है और उसकी नमी भी कम होती है.
दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में पिछले कुछ दिनों से गर्म हवाएं चल रही हैं. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लोग भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं. राजस्थान के ज्यादातर इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ऊपर बना हुआ है. पिछले 24 घंटे में राज्य का अधिकतम तापमान बांसवाड़ा में 42.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. फलोदी में पारा 42.2 डिग्री, डूंगरपुर में 41.7 डिग्री, टोंक में 41.3 डिग्री तक पहुंच गया. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कई जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री अधिक है.
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)