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- ■राष्ट्रीय संगोष्ठी : पं.माधवराव सप्रे जयंती समारोह पर राष्ट्रीय संगोष्ठी और अलंकरण समारोह.
■राष्ट्रीय संगोष्ठी : पं.माधवराव सप्रे जयंती समारोह पर राष्ट्रीय संगोष्ठी और अलंकरण समारोह.
♀ डॉ. प्रेम जनमेजय को ‘पं.माधवराव सप्रे छत्तीसगढ़ मित्र साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान’ से नवाजा गया

♀ अतिथि-कथाकार ममता कालिया,पत्रकार सुदीप ठाकुर
♀ स्वागतवक्तव्य डॉ. सुशील त्रिवेदी, संचालन डॉ. सुधीर शर्मा.

■दिल्ली-

पं माधवराव सप्रे जयंती समारोह पर राष्ट्रीय संगोष्ठी और अलंकरण समारोह का आयोजन हिंदी भवन दिल्ली में किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार सुश्री ममता कालिया ने सप्रे जी की कहानियां विश्व में मानवता का प्रसार करती हैं।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार सुश्री ममता कालिया ने कहा कि आज हिंदी भवन दिल्ली में इतिहास प्रवेश कर रहा है। आज 151 वर्ष बाद सप्रे जी के माध्यम से विश्व का नवबोध हुआ है। भारतीयता की रक्षा करना हमारी परंपरा रही है। पं माधवराव सप्रे ने हिंदी के नवजागरण काल में भारतीय मनुष्य के आत्मसम्मान के लिए कार्य किया। मराठी भाषी होकर वे हिंदी सहित अन्य भाषाओं का सम्मान करते हैं। आज हमें भारतीयता के साथ विश्वबोध को महसूस करना चाहिए। आज तकनीकी और सोशल मीडिया इसका माध्यम बन रही है। आज की समस्या असहिष्णुता की समस्या है। सप्रे जी की भी आज यही चिंता होती। स्वदेशी आज परिदृश्य गायब हो रही है।समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री सुदीप ठाकुर ने कहा कि युवाओं को हमें जोड़ना चाहिए। मात्र पचपन साल के जीवन काल में सप्रे जी ने अतुलनीय योगदान दिया है। हिंदी नवजागरण अन्य नवजागरणों से अलग था। मैनैजर पाण्डेय ने उन पर महत्वपूर्ण कार्य किया। पत्रकारिता के विश्वविद्यालय में सप्रे जी के साहित्य और पत्रकारिता पर अध्ययन होता है। आज यह तय करना होगा कि हमें संकीर्ण भारतीयता चाहिए अथवा पं माधवराव सप्रे की भारतीयता या महात्मा गांधी की भारतीयता चाहिए।
डॉ सुशील त्रिवेदी ने स्वागत भाषण करते हुए कहा कि सप्रे जी ने धर्म, अध्यात्म और विचारधारा से परे जाकर अपने समय में भारत को विश्व का बोध कराया । संचालन करते हुए डॉ सुधीर शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ मित्र ने दिल्ली का सफर तय किया है। डॉ सुधाकर पाठक ने दिल्ली के साहित्यकारों का परिचय दिया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीश पंकज ने कहा कि हमारी भारतीयता में विश्व बोध समाया हुआ है। आज का समय अपने देश को विखंडन करने वाले लोगों के महिमा मंडन का समय है। आजादी के अमृत महोत्सव में अनेक साहित्यकार सेनानी भुला दिए गए हैं। हम सब को मिलकर सप्रे जी के माध्यम से विश्व में बंधुत्व की भावना का प्रसार करना चाहिए।
आथर्स गिल्ड आफ़ इंडिया के महासचिव डॉ शिवशंकर अवस्थी ने कहा कि आजादी के आंदोलन के समय साहित्यकार और पत्रकारों ने जनमानस में भारतीयता की समझ विकसित की। 1900 में लिखी सप्रे जी की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी ने प्रगतिशील कहानी की नींव रखी।
इस अवसर पर व्यंग्य यात्रा पत्रिका और उसके संपादक डॉ प्रेम जनमेजय को पं माधवराव सप्रे छत्तीसगढ़ मित्र साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान प्रदान किया गया। अतिथियों ने छत्तीसगढ़ मित्र के जून अंक, नीरज मनजीत और अन्य कवियों के संग्रह का विमोचन किया। समारोह में राजकमल प्रकाशन समूह के प्रधान श्री अशोक माहेश्वरी सहित दिल्ली और छत्तीसगढ़ सहित अन्य स्थानों के सौ से अधिक साहित्यकार उपस्थित थे। अंत में काव्य गोष्ठी भी हुई।
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