- Home
- Chhattisgarh
- ■पिता पर एक छोटी कविता : सुनीता अग्रवाल [रांची,झारखंड]
■पिता पर एक छोटी कविता : सुनीता अग्रवाल [रांची,झारखंड]
4 years ago
540
0
♀ पिता : एक फ़रिश्ता
नहीं देखता वो
अपने सर पर
धूप है या है छांव॥
नहीं देखता
है चप्पल पैर में
या जल रहे पाँव॥
एक फ़रिश्ता है पिता
गहरा,अनोखा एक
रिश्ता है।
रख विश्वास हर मोड़ पर
चलना सिखलाते।
गहरा दरिया
हो कितना ही
खिंचता जीवन-नाव॥
■कवयित्री संपर्क-
■76774 57423
◆◆◆ ◆◆◆
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)