■कविता : डॉ. बलदाऊ राम साहू.
4 years ago
294
0
♀ पिता
पिता आज आजमाने लगे हैं
राह कठिन बताने लगे हैं।
सुख और दुख की परिभाषा
नियम नया लगाने लगे हैं।
अपने और पराये का वो
भेद सभी बताने लगे हैं ।
कल क्या होगा, सोचो समझो,
अनुमान भी लगाने लगे हैं।
दूर कहीं था घोर अँधेरा
उजियारा बगराने लगे हैं ।
कहीं शिखर पर जा पहुँचें
मंजिल वो बताने लगे हैं ।
धूप बारिश से रहें सुरक्षित,
छत बड़ा बनाने लगे हैं ।
■कवि संपर्क-
■94076 50458
◆◆◆ ◆◆◆
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)