■लिमवा के पेड़वा हावे जुड़वासा विशेष : अशोक पटेल ‘आशु’ [शिवरीनारायण छत्तीसगढ़]
लिमवा के पेड़वा हावे हरियर-हरियर
जेखर छईहा लागे ओ सुग्घर-सुग्घर।
जिन्हा बिराजे हावे देवी दाई शीतला
माथ ल नवावा मैं हर तोरे चरण ला।।
आसिस देबे ओ दाई अपन भगत ला
अँचरा के छईहा दे दे इही जगत ला।
तोर बिना सुन्ना हावे मन के मन्दिरवा
रद्दा निहारय ओ दाई तोरेच दुलरुवा।।
लिमवा के पेड़वा म तही बिराजे दाई
जुड़-जुड़ छइहा म तय ह समाए दाई।
दुख-पीरा तय हरथस तन के तपन ल
सुख ल भर देथस तय हरके अगन ल।।
तोरेच सवारी ओ दाई गदहा हर बने हे
पिठवा म बइठे तय हर सुग्घर लागे हे।
चारे भुजा म तोरे चारे हथेली ओ दाई
एक ठन हाथे दाई मंगल कलसा सजे हे।।
दूसर हाथे म सूपा तय हर धारे दाई
तीसर म धारे तय हर बहिरी ल दाई।
चउथे म डारा लिमवा ल धारे तय हर
भक्तन के करथस दाई तय हर भलाई।।
चेचक माता ओ दाई तही कहाये ओ
जुड़ शीतला दाई तय हर कहाये ओ।
तेल हरदी म तय हर शांति कराए दाई
अषाड़ मास तय जुड़वासा कराए ओ।।
■संपर्क-
■98278 74578
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chhattisgarhaaspaas
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