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- ■पुस्तक समीक्षा : ‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें’ ■लेखक-राम नगीना मौर्य ■समीक्षक-करुण प्रकाश सक्सेना.
■पुस्तक समीक्षा : ‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें’ ■लेखक-राम नगीना मौर्य ■समीक्षक-करुण प्रकाश सक्सेना.
♀ आम आदमी की बात-‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें’
♀ आवरण-वंशीलाल परमार
♀ रेखांकन-वंदना पंवार
♀ प्रकाशक-रश्मि प्रकाशन, लखनऊ
‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें’ कहानी सँग्रह का शीर्षक इतना शानदार व आकर्षक है कि आम आदमी को पसंद आयेगा ही, मुझे व्यक्तिगत तौर पर यह शीर्षक बेहद पसंद आया।
‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें’ कहानी सँग्रह का मुख्य आवरण बेहद आकर्षक बना है। इस सँग्रह में दस कहानियाँ समाहित हैं, जो सभी अपने आप में आम आदमी के आसपास घूमती हुई प्रतीत होती हैं। हर कहानी में यही लगता है कि जो जिस कहानी को पढ़ता है, उसी में खो जाता है।
पहली कहानी जो इस सँग्रह का शीर्षक भी है, ‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें’ में कथाकार श्री रामनगीना जी ने ऐसा दिल से लिखा है कि हम भी प्लेटफॉर्म और रेलगाड़ी में साथ ही सफ़र कर रहे हैं। इस सँग्रह में प्रथम कहानी में मथुरादास को अपने परिवार के साथ यात्रा करते हुए बताया गया है। इसमें पाठक को यही प्रतीत होता है कि वह भी रेल के डिब्बे में ऊपरी सीट पर बैठकर यात्रा कर रहा है। सच कहूँ तो मुझे भी ऐसा ही लगा। कथाकार को विशेष तौर इस कहानी के लिए मंगलकामनाएं देता हूँ। इस कहानी में कथाकार ने नए शादी-शुदा जोड़े की मीठी दास्तान का विस्तृत लेखन किया है। छोटी-छोटी बातों का बेहद बारीकी से मुआयना किया है।
कहानी ‘रोटेशन सिस्टम’ में कथाकार ने बेहद अनूठे ढ़ंग से कहानी लिखने का सफल प्रयास किया है, जिसमें ‘डायनिंग टेबल’ की कुर्सियां आपस में क्या बातचीत करतीं, क्या कहतीं हैं, कथाकार ने बेहद आसान भाषा में समझाने का प्रयास किया है। ऐसी काल्पनिक कहानियाँ कम ही देखने को मिलती हैं, जिसमें निर्जीव वस्तुएं भी आपस में कैसे-कैसे वार्तालाप करती हैं। अच्छी रही कहानी।
कहानी ‘उन्होंने नाम नरेश ‘समथिंग’ बताया था’ में बेहद सुंदर चित्रण किया गया है। इस कहानी में कथाकार ने एक आम रिटायर्ड आदमी के दैनिक जीवन की गतिविधियों की व्याख्या की है। रिटायर्ड व्यक्ति का जीवन सामान्य जीवन से थोड़ा अलग हो जाता है। समाज में, अथवा उसके पुराने कार्यस्थल पर उसे वह सम्मान नहीं मिल पाता, जिसका वह सदा हकदार रहता है। जो व्यक्ति उसी कार्यालय में लगभग तीस वर्षों से ज्यादा कार्य किया हो, वहीं उसके व्यक्तिगत कार्य को नजरअंदाज किया जाता है। या सीधी भाषा में कहें तो परेशान किया जाता है।
इस कहानी में लेखक ने उसी की पूरी व्यथा, कहानी के नायक के माध्यम से कहने का सफल प्रयास किया है।
सभी कहानियाँ बेहद सुंदर ढ़ंग से सँजोई गयी हैं।
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