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■लघुकथा : तारकनाथ चौधुरी.
4 years ago
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♀ अमलतास
प्रशासनिक स्थानांतरण आदेश,कदापि शासकीय कर्मचारियों के लिए सुखद नहीं होता।विद्यालय की प्राचार्या का तबादला आदेश सभी के लिए हतप्रभ करने वाला और दुखद घटना की तरह था।सब के ह्रदय में एक सी वेदना लिए यही प्रश्न सिसकियाँ ले रहा था कि मैडम की इस पर क्या प्रतिक्रिया होगी?किसी भी गाडी़ की आवाज़ सुन सब एक साथ उस खिड़की की तरफ देखने लगते,जहाँ से उनकी कार को स्पष्ट आता हुआ देखा जा सकता था।समय की पाबंद प्राचार्या का यह विलंब स्टाफ मेंबर की व्याकुलता को बढा़ रहा था। अब लगभग सभी(ज्यादातर महिला व्याख्यातायें)मुख्य द्वार पर प्रहरी सा खडे़ उस अमलतास के पेड़ के पास आकर बैठ गये थे जिसे प्राचार्या ने अपने हाथों से रोपा था और शिशु सा संरक्षण देकर पल्लवित, परिवर्धित किया था।इस पेड़ से उनका लगाव कितना गहरा था,उसका आभास उनके इस कलाप से हो गया था कि प्रथम पुष्प के खिलने पर उन्होंने माता सी हर्षित होकर विद्यालय कर्मचारियों के साथ अमलतास की छाँव में तस्वीर खिंचवाकर सोशल मीडिया में साझा किया था।मध्यान्ह हो चुका था किंतु प्राचार्या नहीं पहुँची थी।स्टाफ रुम में चाय की चुस्कियों के बीच उनकी बिदाई कार्यक्रम की रूपरेखा खींची जाने लगी थी।तभी किसीने कहा- मैडम,इस परिसर से कभी विदा नहीं हो सकती इस हरेभरे अमलतास की छाँव बनकर मैडम हमेशा हमारे साथ होंगी।
■लेखक संपर्क-
■83494 08210
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