- Home
- Chhattisgarh
- ०बाल ग़ज़ल : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘ नवरंग ‘
०बाल ग़ज़ल : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘ नवरंग ‘
4 years ago
348
0
०मन हे ओकर भींजे के
मिश्का धूम मचावत हे
हाँसत हे , बिजरावत हे
मन हे ओकर भींजे के
पानी मा इतरावत हे
गेंगरुआ ला देखेबर
घेरी बेरी जावत हे
दाई के लुगरा धरके
घर मा खूब लजावत हे
मनवाएबर बात अपन
मामी संग गोठियावत हे
०कवि सम्पर्क-
०7974850694
००००० ०००००
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)