• Chhattisgarh
  • आलेख : एनडीटीवी मसला सिर्फ एक चैनल या पत्रकार का नहीं है – बादल सरोज

आलेख : एनडीटीवी मसला सिर्फ एक चैनल या पत्रकार का नहीं है – बादल सरोज

4 years ago
342

एनडीटीवी के जबरिया और तिकड़मी टेकओवर पर देश भर में विक्षोभ और चिंता की लहर सी उठी है। मीडिया के भविष्य को लेकर फ़िक्र बढ़ी है – ज्यादातर लोगों ने इसे ठीक उसी तरह लिया है, जिस तरह लिया जाना चाहिए और वह यह कि : एनडीटीवी का अधिग्रहण उसे चलाने के लिए नहीं, उसे उसके मौजूदा स्वरूप में न चलने देने के लिए किया गया है। यह अधिग्रहण भारत के इतिहास में अब तक की सबसे देशघाती और निरंकुश हुकूमत को चलाने वाले गंठजोड़ के अपकर्मों को उजागर करने वाली हर छोटी–बड़ी संभावना को समाप्त करने के लिए है। सूचना के हरेक छोटे–बड़े स्रोत को गोद में बिठाकर उसे मालिक की अपनी आवाज – हिज मास्टर्स वॉइस – में बदल देने के लिए है।

ठीक यही वजह है कि इस अधिग्रहण को सिर्फ रवीश कुमार या एनडीटीवी तक सीमित रखकर देखना समस्यापूर्ण नजरिया है। निस्संदेह रवीश कुमार हमारे समय के बड़े पत्रकार हैं, एक बेहद कठिन समय में उन्होंने पत्रकारिता की लाज ही नहीं रखी, उसे एक नयी वर्तनी, मुहावरा और जन, खासकर हिंदी भाषी दर्शकों के बीच सम्मान प्रदान किया है। उन्होंने आम आदमी को – लोक को – खबरों का केंद्र बनाया है, पत्रकारों की एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया है और इसी के साथ युवा पत्रकारों की एक पूरी टीम – जिसमे इसी वर्ष के लोकजतन सम्मान से अभिनंदित अनुराग द्वारी भी हैं – तैयार की है और ऐसा करते हुए जनता के बीच भी असाधारण लोकप्रियता हासिल की है।

इसमें भी कोई शक नहीं कि प्रणव और राधिका रॉय ने एनडीटीवी को व्यावसायिक संस्थान के रूप में चलाते हुए भी भारत के मीडिया – विजुअल मीडिया – का एक अलग तरह का मानक बनाया है। सनसनी और प्रायोजित तड़के में बघारे प्रोपेगंडा की जगह ख़बरों को अपेक्षाकृत सलीके से पेश करने की सलाहियत दी है। तात्कालिक राजनीतिक दबाबों में न आकर अक्सर अपनी रीढ़ की सलामती का सबूत दिया है। तय है, ऐसी हालत में कुछ घाटे उठाने पड़ते हैं और यह जबरिया अधिग्रहण ऐसे ही घाटों में से एक है, मगर फिर भी इस पूरे घटनाविकास को सिर्फ रवीश कुमार या एनडीटीवी तक पर केंद्रित कर देखने से इस घटना के वास्तविक निहितार्थ को नहीं समझा जा सकता। ऐसा करते में उन खतरों को भी अनदेखा कर दिए जाने की आशंका है, जो इस अधिग्रहण से सामने आये हैं।

एनडीटीवी का अडानी टीवी बन जाना हमारे कालखण्ड की एक ऐसी दुर्घटना है, जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में समूचे मीडिया पर धनपशुओं और उनकी पालित-पोषित सत्ता के वर्चस्व की संपूर्णता के रूप में दिखेगा। इसलिए इसे व्यक्तियों से ऊपर उठकर प्रवृत्तियों के हिसाब से देखना उचित होगा। इस अधिग्रहण के बाद लंदन में बोलते हुए गौतम अडानी ने दावा किया है कि अब तक भारत में कोई भी ऐसा चैनल नहीं है, जो विश्व स्तर का हो, इसलिए वे एनडीटीवी को नया रूप देकर उसे एक विश्व स्तर का चैनल बनाना चाहते हैं। वे भूल गए कि ऐसा कहते में वे एक तरह से खुद अपने स्वामित्व वाले मीडिया सहित भारत के बाकी चैनलों को स्तरहीन बताते हुए उन्हें आईना दिखा रहे थे। उसके क्षरण के 2014 के बाद पूर्ण पराभव का शिकार होकर गोदी मीडिया में बदल जाने की स्थिति को स्वीकार कर रहे थे। मगर स्वीकारोक्ति का यह पूर्ण सच भी असल में आंशिक सच ही है। जैसा कि ऊपर लिखा गया है : एनडीटीवी का अधिग्रहण उसे चलाने के लिए नहीं, उसे उसके मौजूदा स्वरूप में न चलने देने के लिए किया गया है।

दूसरी बात यह कि जैसा कि कुछ विद्वानों द्वारा दावा किया जा रहा है – यह वैसा, एक कंपनी का दूसरी में मिल जाना या किसी के द्वारा उसे खरीद लिया जाना जैसा कारोबारी कारनामा नहीं है। यह सिर्फ व्यावसायिक मामला नहीं है। यह मिल्कियत और स्वामित्व का एक धन्ना सेठ के हाथ से निकल कर दूसरे के हाथ में जाना भर नहीं है। हालाँकि किसी लोकतांत्रिक समाज में सवाल तो यही होना चाहिए था कि मीडिया किसी औद्योगिक घराने या धनासेठ के हाथ में होने ही क्यों चाहिये? बहरहाल यह “अखबार और अब आज का मीडिया टीवी वगैरह तो हमेशा ही किसी न किसी की पूंजीपति के हाथ में रहे हैं, इसलिए इसमें नया क्या है” जैसा अति सरलीकरण भी नहीं है। अडानी सामान्य धन्नासेठ नहीं है – उनकी उत्पत्ति और विकास पूंजीवाद के सामान्य नियमों – पैसा जुटाना, उसके निवेश से संसाधन जुटाकर उत्पादन में लगाना, माल पैदा करना, उसे बेचकर मुनाफे के जरिये और पैसा कमाना – जैसी प्रक्रिया के अनुसार नहीं हुई है। सत्ता से सांठगांठ करके की गयी तिकड़मों से राष्ट्र और जनता की सम्पत्तियाँ हड़पने, बैंकों को लूटने के जरिये हुयी है। अर्थशास्त्र की भाषा में इसे आदिम संचय कहते हैं और पूंजीवाद की इस किस्म को दरबारी पूंजीवाद – क्रोनी कैपिटलिज्म – कहते हैं। इस दरबारी पूंजीपति का एनडीटीवी पर कब्जा करना पत्रकारिता को नयी ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए नहीं है। यह दरबार के लिए, दरबार द्वारा, दरबार का कारनामा है, जिसका मुख्य मकसद सिर्फ और केवल राजा का बाजा बजे, यह पक्का करना है।

यह बात अधिगहण की पूरी साजिश में बरती गयी रहस्यमयी गोपनीयता और सभी प्रचलित नियम, कानूनों को ताक पर रख इसे अंजाम देने में “ऊपर वाले” की भूमिका से भी साफ़ हो जाता है। एनडीटीवी द्वारा लिए गए 400 करोड़ रूपये का ऋण कर्जदाता कम्पनी से होते हुए अम्बानी के खाते में ट्रांसफर हो जाना और अम्बानी द्वारा उसे 300 करोड़ का घाटा उठाकर अडानी को सौंप देना व्यावसायिक गतिविधि नहीं है। यह घाटे का सौदा – बैड इकोनॉमिक्स – है और रिलायंस समूह इतना नादान और भोला नहीं है कि वह ऐसे नुकसानदायी सौदे करे, खासतौर से तब जब अम्बानी खुद मीडिया के धंधे में हैं, इसके बहुत बड़े वाले कब्जाधारी हैं। अगर वे चाहते, तो जो 29.18 प्रतिशत शेयर्स उनके पास थे, उनके आधार पर एनडीटीवी का सम्पादकीय और प्रबंधकीय नियंत्रण हथिया सकते थे – मगर उन्होंने यह काम अडानी को सौंप दिया। जो मुकेश भाई अम्बानी इतनी उदारता अपने इकलौते सगे भाई अनिल अम्बानी के साथ भी नहीं दिखाए थे, उन्होंने यह सद्भावनावश तो नहीं ही किया होगा। इसमें जरूर “ऊपर वाले” का हाथ रहा होगा। इसलिए यह काण्ड सिर्फ व्यावसायिक चतुराई नहीं है, यह राजनीतिक घपला है। एक ऐसा घपला जिसमे प्रधानमंत्री कार्यालय की लिप्तता है – उन्होंने स्वयं अपने और अपने चहेते दरबारी पूंजीपति के हितसाधन के लिए सारी डोरों को हिलाया–डुलाया है।

स्वतंत्र भारत में पूँजी के वर्चस्व और एकाधिकार – मोनोपोली – को रोकने के लिए एमआरटीपी एक्ट जैसे क़ानून रहे। मीडिया के बारे में खासतौर से नीति रही कि इसमें विदेशी पूंजी न आये और देशी पूंजी भी अपनी थैलियों की दम पर अखबार, टीवी, रेडियो सहित चौतरफा एकाधिकार न जमाये। उदारीकरण की फिसलन शुरू होने तक आमतौर से इसका पालन हुआ। मगर 2014 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपने अपराधों के उजागर होने के डर से घबराने वालों के सत्तासीन होने के बाद से टाट उलट गया। आज भारत के जितने भी बड़े और ज्यादा प्रसार वाले अखबार, टीवी चैनल्स आदि मीडिया समूह हैं, वे अम्बानी या अडानी के बटुये में समा चुके हैं। तीन साल पहले तक अम्बानी के रिलायंस के स्वामित्व में 80 करोड़ दर्शकों तक पहुँच वाले 72 टीवी चैनल्स थे। अडानी के हाथ में भी कोई आधा सैकड़ां चैनल्स की मालिकी थी। इस बीच यह संख्या और बढ़ी होगी। देश में सबसे ज्यादा प्रसार संख्या वाले – खासकर हिंदी भाषा के – अखबारों को सीधे या आड़े–टेढ़े तरीकों से इन दोनों समूहों द्वारा कब्जाया जा चुका है। यह अभी आगाज है। अति केन्द्रीकरण पूँजीवाद का नियम और दूसरे देशों के अनुभव चिंताजनक तस्वीर दिखाते हैं। वर्ष 2011 में अमरीका में कोई 50-60 कम्पनियां थीं, जिन्होंने मीडिया के 90 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा किया हुआ था। दस साल के भीतर ही आज स्थिति यह है कि 90 प्रतिशत अमरीकी मीडिया का कब्जा कुल जमा 5-6 कंपनियो के चंगुल में पहुँच गया। कहने की जरूरत नहीं कि इसके और अमरीकी राजनीति के ट्रंपीकरण के बीच सीधा संबंध है।

भारत में अब तक दो प्रेस कमीशन बने हैं, पहला 1954 में और दूसरा 1980-81 में ; इन दोनों ही प्रेस कमीशन का मानना था कि भारत में प्रेस की स्वतन्त्रता को बुनियादी खतरा मीडिया के औद्योगिक घरानो के स्वामित्व से है। इससे बचने के लिए उसने अनेक उपायों पर भी राय–मशविरा किया था। मीडिया वर्चस्व निरुत्साहित करने के कदमों के अलावा उसने पूँजी घरानो पर मीडिया की अति-निर्भरता रोकने के लिए विज्ञापन नीति सुझाई थी, सरकारी विज्ञापनों के बारे में इस तरह के प्रावधान किये थे कि वे प्रकाशित सामग्री – कंटेंट – के आधार पर नहीं, प्रसार संख्या – सर्कुलेशन – के आधार पर मिले। मीडिया पर एकाधिकार रोकने के लिए क्षेत्रीय तथा स्थानीय अखबारों को इस विज्ञापन नीति में संरक्षण प्रदान किया गया था। सार्वजनिक नियंत्रण वाले प्रसारण संस्थान बने, उनकी पारदर्शिता और निष्पक्षता की देखरेख के लिए प्रसार भारती और प्रेस कौंसिल जैसे स्वतंत्र निकाय गठित हुए। हालांकि इस समझदारी को ईमानदारी से कभी लागू नहीं किया गया। मोदी की अगुआई में कारपोरेट और हिंदुत्ववादी साम्प्रदायिकता के गठजोड़ के सत्ता में आने के बाद तो इस स्थिति को पूरी तरह उलट ही दिया गया। सरकारी और सार्वजनिक उद्यमों, संस्थानों के विज्ञापन दण्डवत कराने के औजार बना दिए गए। मोदी राज में तो कारपोरेट और धन्नासेठों के विज्ञापन भी इसी आधार पर दिए और रोके जाने लगे। इसका जो असर होना था, वह हुआ भी ; मीडिया का रूप–स्वरुप ही बदल गया, सम्पादक नाम की संस्था ही समाप्त हो गयी, पत्रकारों का गुणधर्म ही बदल दिया गया। नतीजा सामने है : दुनिया के पत्रकारों के प्रतिष्ठित संगठन “रिपोर्टर्स विथाउट बॉर्डर्स” की रिपोर्ट के अनुसार भारत प्रेस स्वतंत्रता के मामले में 180 देशों में 150वे नंबर पर है – 2021 में यह नंबर 142 था – यह गिरावट लगातार जारी है। यह बढ़ती हुयी तानाशाही का एक प्रमुख संकेतक है।

ठीक यही वजह है कि यह मसला सिर्फ एक पत्रकार या एक टीवी चैनल का नहीं है। इसलिए इसका जवाब यू–ट्यूब चैनल शुरू करके या ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स बढ़ाकर नहीं दिया जा सकता। सोशल मीडिया कहे जाने वाले ये सभी माध्यम भी अब “बिग ब्रदर” की निगाहों में हैं। अल्गोरिथम का प्रबंधन और इस्तेमाल करके उन पर भी अंकुश लगाया जाने लगा है। यह तानाशाही सिर्फ मीडिया का गला घोंटने तक सीमित नहीं रहने के लिए नहीं आयी है – यह पूंजीवादी लूट का निर्ममतम राजनीतिक रूप हैं, इसलिए इसका मुकाबला भी राजनीतिक धरातल पर ही हो सकता है।

•बादल सरोज

[ •लेखक ‘ लोकजतन ‘ के संपादक हैं ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

जानिए याददाश्त बढ़ाने के आसान और वैज्ञानिक तरीके, बेहतर मेमोरी के लिए अपनाएं ये आदतें
breaking Chhattisgarh

जानिए याददाश्त बढ़ाने के आसान और वैज्ञानिक तरीके, बेहतर मेमोरी के लिए अपनाएं ये आदतें

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखा छत्तीसगढ़ को भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं भविष्य की क्रिटिकल मिनरल अर्थव्यवस्था का अग्रणी राज्य बनाने का विजन
breaking National

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखा छत्तीसगढ़ को भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं भविष्य की क्रिटिकल मिनरल अर्थव्यवस्था का अग्रणी राज्य बनाने का विजन

रेल यात्रियों को बड़ी राहत, अब घर बैठे करें अतिरिक्त लगेज की ऑनलाइन बुकिंग, हवाई यात्रा जैसी सुविधा रेलवे में भी शुरू
breaking Chhattisgarh

रेल यात्रियों को बड़ी राहत, अब घर बैठे करें अतिरिक्त लगेज की ऑनलाइन बुकिंग, हवाई यात्रा जैसी सुविधा रेलवे में भी शुरू

वरिष्ठजन कल्याण महासंघ के चुनाव में घनश्याम कुमार देवांगन सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित
breaking Chhattisgarh

वरिष्ठजन कल्याण महासंघ के चुनाव में घनश्याम कुमार देवांगन सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री श्री साय

Repo Rate पर RBI का बड़ा ऐलान, 5.25% पर बरकरार दर, जानिए EMI पर क्या होगा असर
breaking National

Repo Rate पर RBI का बड़ा ऐलान, 5.25% पर बरकरार दर, जानिए EMI पर क्या होगा असर

बृजमोहन अग्रवाल-अमित कटारिया विवाद: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिया सांसद का पक्ष, कहा- अधिकारी सम्मान से करें बात, हिसाब से करें रिस्पांस
breaking Chhattisgarh

बृजमोहन अग्रवाल-अमित कटारिया विवाद: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिया सांसद का पक्ष, कहा- अधिकारी सम्मान से करें बात, हिसाब से करें रिस्पांस

छत्तीसगढ़ की बेटी सोनम शर्मा करेगी भारतीय नेटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व, हांगकांग में होगी प्रतियोगिता
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की बेटी सोनम शर्मा करेगी भारतीय नेटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व, हांगकांग में होगी प्रतियोगिता

20 लाख की प्रतिमा पर उठे सवाल, डेढ़ साल में उखड़ने लगी बाहरी परत, जांच और कार्रवाई की मांग तेज
breaking Chhattisgarh

20 लाख की प्रतिमा पर उठे सवाल, डेढ़ साल में उखड़ने लगी बाहरी परत, जांच और कार्रवाई की मांग तेज

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी, 15 अक्टूबर तक आम जनता से मांगे गए सुझाव
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी, 15 अक्टूबर तक आम जनता से मांगे गए सुझाव

मॉनसून में बाथरूम की इन चीजों को जरूर बदलें, वरना बढ़ सकता है बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा
breaking Chhattisgarh

मॉनसून में बाथरूम की इन चीजों को जरूर बदलें, वरना बढ़ सकता है बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा

थाइलैंड-दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट के यात्रियों की आपबीती, ‘किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका…’,
breaking Chhattisgarh

थाइलैंड-दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट के यात्रियों की आपबीती, ‘किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका…’,

छत्तीसगढ़ में 14 पुलिस अफसरों के तबादले, 11 थाना प्रभारियों और 3 SI को नई जिम्मेदारी, देखें सूची
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 14 पुलिस अफसरों के तबादले, 11 थाना प्रभारियों और 3 SI को नई जिम्मेदारी, देखें सूची

छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव के बड़े सितारे, दो बेटों ने नेपाल में लहराया तिरंगा, भारत को दिलाया फुटबॉल का गोल्ड मेडल
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव के बड़े सितारे, दो बेटों ने नेपाल में लहराया तिरंगा, भारत को दिलाया फुटबॉल का गोल्ड मेडल

लोकसभा में बिना बहस जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पास, CJI को छोड़ 37 हुआ संख्या
breaking National

लोकसभा में बिना बहस जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पास, CJI को छोड़ 37 हुआ संख्या

छत्तीसगढ़ में मध्य प्रदेश से पांच बाघ लाने की तैयारी, टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बसे वनग्रामों का होगा पुनर्वास
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में मध्य प्रदेश से पांच बाघ लाने की तैयारी, टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बसे वनग्रामों का होगा पुनर्वास

नवा रायपुर में 52 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल, इस साल के नवंबर तक होगा पूरा
breaking Chhattisgarh

नवा रायपुर में 52 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल, इस साल के नवंबर तक होगा पूरा

शोकसभा के नाम पर पूरे दिन कोर्ट का कामकाज बंद नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
breaking Chhattisgarh

शोकसभा के नाम पर पूरे दिन कोर्ट का कामकाज बंद नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

भारतीय बॉक्सर जैस्मिन ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता
breaking Chhattisgarh

भारतीय बॉक्सर जैस्मिन ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा की बड़ी उपलब्धि, सितार वादन में आकाशवाणी से मिला ‘टॉप ग्रेड आर्टिस्ट’ का सर्वोच्च सम्मान
breaking Chhattisgarh

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा की बड़ी उपलब्धि, सितार वादन में आकाशवाणी से मिला ‘टॉप ग्रेड आर्टिस्ट’ का सर्वोच्च सम्मान

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’
poetry

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन