नव गीत : गीता विश्वकर्मा ‘ नेह ‘ [ कोरबा छत्तीसगढ़ ]
3 years ago
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नयी पौध को नहीं सुहाती
है बरगद की छाँव ।
शोर मचाता शहर चाहिए
कच्ची मेंड़ नहीं,
क्लब की रंगीली थिरकन हो
नीरव पेंड़ नहीं,
शाम नशा का पूरा जादू
ऐसा सुंदर ठाँव ।
घर ऐसा सूना सा बँगला
बातें टीवी से,
एक अदद सुंदर मॉडल की
चाहत बीवी से,
भूल सके परिवेश पुराना
परम्परागत गाँव ।
अहं भरे मुख में पैसे की
गर्मी रोबीला,
दीन हीन से दूर रहे मन
होकर गर्वीला,
तीव्र गमन करते संयम से
एकाकी दो पाँव ।
रोक-टोक अम्मा बाबा की
नहीं सहन करना,
अलग-अलग अपनी दुनिया में
खुश होकर रहना,
कलह कुटुम्बी वाला मौसम
रोज-रोज का चाँव ।
•संपर्क –
•99266 23854
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chhattisgarhaaspaas
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