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- भिलाई : प्रख्यात लोक वाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय के लोकांगन परिसर पहुंची आदिवासी अंचल की छात्राएं : अपने पुरखों के वाद्य यंत्र देख भावुक हो गई अबूझमाड़ की बेटियां…
भिलाई : प्रख्यात लोक वाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय के लोकांगन परिसर पहुंची आदिवासी अंचल की छात्राएं : अपने पुरखों के वाद्य यंत्र देख भावुक हो गई अबूझमाड़ की बेटियां…

भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : सुदूर बस्तर अंचल के दुर्गम इलाके में बसे गांव में रहने वाली बेटियां पहली बार शहर देख रही हैं। वनवासी कल्याण आश्रम के सौजन्य से इन बेटियों को पहली बार शहरी परिवेश देखना नसीब हुआ है। संगठन के बारसुर और भनपुरी आश्रम में रह रही और छठवीं से 12 वीं तक अध्ययनरत 35 छात्राएं तीन दिवसीय भिलाई प्रवास पर आई हुई है। पहले दिन 27 अप्रैल की शाम भिलाई पहुंचने पर इन छात्राओं के सम्मान में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रख्यात लोक वाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय के मरोदा सेक्टर स्थित लोकांगन परिसर में हुआ।

कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा व बस्तर जिला के अबूझमाड़ इलाकों में रहने वाली सभी छात्राएं गोंड, माड़िया, मुड़िया और धुरवा समुदाय से हैं। लोकांगन परिसर में स्वागत उपरांत इन छात्राओं के समक्ष रिखी क्षत्रिय के दल की अनुराधा साहू, उपासना, मनीषा व प्रियंका सहित अन्य लोगों ने देवार कर्मा और बैगा करमा नृत्य प्रस्तुत किया। इस दौरान रिखी क्षत्रिय ने इन छात्राओं को देवार कर्मा और बैगा करमा नृत्य का अंतर समझाया। इसके बाद रिखी क्षत्रिय ने अपने दुर्लभ वाद्य संग्रह में से कुछ वाद्य यंत्र इन छात्राओं को दिखाएं और इनका मंचीय प्रदर्शन भी किया। इनमें धनकुल, भेर, चरहे, कोटेला, खंजरी, मांदर,चटकोला, गतका, झड़ी डंडा, कुहकी और टंहडोर जैसे दुर्लभ वाद्य यंत्र शामिल थे। रिखी ने बताया कि उन्होंने यह सारे वाद्य यंत्र जंगल व पहाड़ों में बसे हुए आदिवासियों के बीच से लाए हैं। इन वाद्य यंत्रों को देखकर सभी छात्राएं आश्चर्यचकित और भावुक थी। कुछ ने रिखी क्षत्रिय से कहा भी कि अबूझमाड़ में रहते हुए उनके समुदाय में ऐसे वाद्य यंत्र अब संरक्षित नहीं रह पाए हैं। इसलिए वे पहली बार ऐसे दुर्लभ वाद्य यंत्र देख रही हैं। इस दौरान रिखी क्षत्रिय ने इन छात्राओं को छत्तीसगढ़ अंचल की अलग-अलग लोक परंपराओं की जानकारी भी दी।

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