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ब्रह्माकुमारीज़ : माउंट आबू ज्ञानसरोवर में धार्मिक प्रभाग सम्मेलन : विषय था – वर्तमान प परिस्थितियों में आध्यात्म से समाधान :

माउंट आबू ज्ञानसरोवर [छत्तीसगढ़ आसपास] : ब्रह्मकुमारीज़ मीडिया विंग के चेयर पर्सन राजयोगी करुणा भाई जी ने अध्यक्षीय प्रवचन के रूप में अपनी बातें इस रूप में प्रकट कीं। आपने कहा कि हम सभी संतों के साथ बैठे हैं और उनसे ही सुनने के लिए हम यहाँ प्रस्तुत हैं।

यह ईश्वरीय विश्व विद्यालय आज ८७ वर्ष पूरा कर चुका है और इसने १९५० में ३५० माताओं बहनो के साथ यहाँ माउंट अबू में विश्व सेवा का अपना कार्य शुरू किया था। इनकी मान्यता है की हम बदलें तो विश्व बदले। आज ६० हज़ार बहनें समर्पित होकर , २५ लाख परिवारों तक जा पहुंची हैं ।
बाबा के निर्देश पर हम पहले अपना जीवन पावन बना कर किसी दूसरे को वैल्यूज का संदेश देते हैं।
बाबा ने माता को प्रमुखता दी है अतः ये सभी बी के बहनें यहां प्रमुख भूमिका में हैं। ईश्वर को भी पहले माता रूप में देखा जाता है। उनकी पूजा की जाती है।

ब्रह्माकुमारीज़ धार्मिक प्रभाग की चेयर पर्सन राजयोगिनी मनोरमा दीदी ने आज इस सम्मेलन को अपना आशीर्वचन प्रदान किया। आपने कहा कि भौतिक उपलब्धता हमारे हाथों में समाई हुई है , परन्तु आज समाजिक संत्रास की समाप्ति के लिए हमें आध्यात्मिकता की शरण में जाना ही होगा। आज संसार की हालत देखते हुए कह सकते हैं कि मानवता मर चुकी है और इन सभी का समाधान मात्र आध्यात्मिकता ही है। दुनिया में अगर आज कहीं थोड़ी भी पाकीज़गी बच रही है तो इन संतों में बच रही है। ईश्वर के लिए कहा गया है कि उनको जान लेने से व्यक्ति फिर उनके जैसा ही बन जाता है। आज हमारे पर इस परिसर में ऐसा अवसर आ गया है कि हम उनको ऊनके द्वारा ही जान पाएंगे।
महामंडलेश्वर गो ऋषि स्वामी ज्ञान स्वरूपानंद जी महाराज , जोधपुर ने अपने उद्गार इन शब्दों में प्रकट किये। आपने कहा , आज का यह अवसर बहुत ही सुन्दर अवसर है। जब पुरुषों से संसार का कार्य व्यापार नहीं सम्भला तब माताओं ने नारियों ने इस संसार का कार्य व्यापार अपने हाथों में लिया। ब्रह्माकुमारीज़ का कार्य नारी शक्ति द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।
संसार की परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो , जब मातृ शक्तिओं ने जिम्मेवारी अपने हाथ में ले ली है तो अब समाधान मिल ही जायेगा और उसमे अब कोई देर नहीं होगी। और वह समाधान आध्यात्म से ही निकलेगा। जब हम अपने भीतर का ध्यान करेंगे तभी हमारी आध्यात्मिकता जागेगी।

ब्रह्मऋषि स्वामी महेश योगी , अयोध्या ने भी सम्मेलन को सम्बोधित किया। आपने अपने उद्बोधन से पूर्व सम्मेलन से जय श्री राम का उद्घोष करवाया। वातावरण परिशुद्ध हुआ और ऊर्जा से परिपूर्ण भी। फिर आपने कहा कि यह पावन ज्ञान सरोवर , पावनता , महानता से परिपूर्ण है और यहां जितने भी संस्थान के भाई बहनें हैं सभी को सादर अभिनन्दन है.
आपने कहा , कभी लगता है की आज की समस्याएं बगैर विज्ञान की मदद के नहीं सुधर सकती हैं मगर फिर अहसास होता है कि ऐसा हो नहीं पाया है। यह आध्यात्म से ही संभव हो पायेगा। आध्यात्मिता की जो ऊर्जा यहां पसरी हुई है , उसके सम्पर्क में आने से हमारी विचार धारा उर्ध्व गामी हो जाती है। संसार की सभी समस्याओं को भी इसी ऊर्जा से सुधारना होगा। ऐसी ऊर्जा हमें अपने पूर्वजों के जीवन से प्रेरणा लेकर प्राप्त करनी है।
कर्नाटक से पधारे स्वामी वसवप्पा जी ने अपने उद्गार प्रकट किये। आपने कहा कि ईश्वरीय विश्व विद्यालय का यह प्रयास सराहनीय है। सभी को साधुवाद।
अयोध्या से पधारे महाराज पवन दास जी ने कहा कि सभी पूज्य हैं और मैं सभी में श्री राम जी का ही स्वरुप देख रहा हूँ। अतः मैं सभी माताओं को प्रणाम कर रहा हूँ क्योंकि इन्ही माताओं के द्वारा ही विश्व का कल्याण होगा।
धन्यवाद ज्ञापन बीके नारायण भाई इंदौर ने किया.
संचालन बीके कमल बहन ने किया.

•कुमार प्रशांत और अन्य कलाकारों द्वारा शिव तांडव नृत्य प्रस्तुत करते हुए
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