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काव्य संध्या : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय द्वारा आयोजित आमंत्रित कवि : हेमंत मढ़रिया, छगनलाल सोनी, गजेंद्र द्विवेदी, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘ सब्र ‘, ओम पाण्डेय, पारुल पाण्डेय, हाजी रियाज खान गौहर :

भिलाई – 3 जिला दुर्ग छत्तीसगढ़ : 28 मई को भिलाई -3 विट्ठलपुरम में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। मां वीणापाणि की आराधना के पश्चात हेमंत मढ़रियाजी ने संचालन की बागडोर संभाली। छगन सोनी ने पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे पर सशक्त काव्य पाठ कर गोष्ठी का आगाज़ करते हुए कहा-

•छ्गनलाल सोनी
जीवन जैसे जंग हुआ है
दुविधाओं का संग हुआ है
जंगल खोकर धन का पाना
हवा खोकर पंख का आना
इन वृक्षों की जान बचे तो
मैं भी अपनी जान बचा लूं।
गजेन्द्र द्विवेदी ने समाज में बढ़ रहे वैमनस्य के बीच प्रेम का संदेश देते हुए वर्तमान की खाई को पाटने का सार्थक प्रयास करते हुए कहा –

•गजेंद्र द्विवेदी
प्रेम स्नेह अनुराग लिखूंगा
नहीं किसी के दाग़ लिखूंगा
भुला रहे जो स्वयं धर्म को
उन अंधों को जाग लिखूंगा।
चरोदा भिलाई से पधारे डॉ नौशाद सिद्दीकी ने अपने ही अंदाज में बाज़ारवाद और उसकी समस्या से जूझते परिवारों का यथार्थ चित्र खींचते हुए काव्य पाठ किया –

•डॉ.नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘ सब्र ‘
कैसे रहें बताओ अब,सुख शांति के साथ?
घर का सुकुं तो रोज़ की तकरार खा गई।
विट्ठलपुरम के बाल कवि ओम पाण्डेय ने अपनी उम्र का अतिक्रमण कर प्रौढ़ रचना प्रस्तुत करते हुए जमाने की मानसिकता पर कटाक्ष किया –

•ओम पाण्डेय
तू भूखा है,तब भी शांत रह
रोटी तो कोई नहीं देगा
तेरी भूख का प्रचार करने को
यह जमाना है न।
नंगे पांव ही चल
चप्पल का क्या करेगा ?
चप्पल होगी तब भी
तेरे पांव में छाले देने को
यह जमाना है न।
चरोदा भिलाई शासकीय विद्यालय की शिक्षिका सुश्री पारुल पाण्डेय ने काव्यपाठ करते हुए कहा –

•पारुल पाण्डेय
मुझे लिखना भाता नहीं
क्योंकि पाठक सवाल उठता नहीं
पूछताछ नहीं ये जो लिखा है
वो किया कब और
लेखक बड़ी शान से
अपने झूठ को साहित्य बताता है
इतने में यश घंटे तो कह देता है
यथार्थवाद।
सेक्टर से पधारे शायर हाजी रियाज खान गौहर ने अपनी ग़ज़ल के माध्यम से गांव का यथार्थ और पहचान खो शहर की भीड़ में गुम होते, छटपटाते इंसान का हूबहू चित्र खींचकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया –

•हाजी रियाज खान गौहर
लौटकर जाऊं कैसे कभी गांव में
थी कोठी मिरी बिक गई गांव में।।
काव्य गोष्ठी के संचालक हेमंत मढ़रिया ने मां विषय पर भावपूर्ण काव्यपाठ करते हुए कहा –

•हेमंत मढ़रिया
मां
सृष्टि की सबसे सुंदर रचना है
सृष्टि की सबसे सुंदर रचना ही
मां है।
डॉ प्रेमकुमार पाण्डेय ने टेक्नालॉजी के जंगल में गुम होते बचपन पर चिंता व्यक्त करते हुए बचपन का पता विषय पर सशक्त काव्यपाठ किया –
मेरे बचपन का पता
दालान के कोने के छज्जे पर
घोंसले से झांकते
पंख विहीन चूजों की
पीली चोंच में
दाना डालती चिड़िया से
पूछ सकते हो
वो बता देगी मुकम्मल
मेरी पतंग का रंग भी।
इस काव्य गोष्ठी में साहित्य रसानुरागी श्रीमती प्रतिमा पाण्डेय एवं श्रीमती एन विजया एवं श्री आदित्य कुमार श्रीवास ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
काव्यगोष्ठी शाम छः बजे से शुरू होकर नौ बजे रात तक चली। दो दौर में कुल तीन रचनाओं का पाठ हुआ। बीच- बीच में सुधीजनों द्वारा कविताओं की संक्षिप्त समीक्षा भी प्रस्तुत की गई। भोजनोपरान्त गोष्ठी इस संकल्प के साथ विसर्जित हुई कि ये दौर जारी रहेगा।
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chhattisgarhaaspaas
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